दिल्ली में बिजली डरो में बढ़ोतरी की संभावनाएं तेज हो गई है जब Appellate Tribunal for Electricity (APTEL) कंपनी ने 21 अप्रैल 2026 को डीईआरसी की याचिका को खारिज कर दिया। आदेश के अनुसार डिस्कॉम्स के 38000 करोड रुपए से अधिक बकाया की रिकवरी प्रक्रिया शुरू करनी होगी। जिसका सीधा असर बिजली उपभोक्ताओं के बल पर देखा जा सकता है।

Delhi Electricity के टैरिफ का दबाव, बकाया का बढ़ता बोझ
प्राप्त डॉक्यूमेंट की जानकारी के अनुसार दिल्ली की बिजली वितरण कंपनी BSES राजधनी, BSES यमुना और टाटा पावर दिल्ली पर लगभग 38000 से लेकर 38500 करोड रुपए का रेगुलेटरी एसेट बकाया है। इस बकाया से उसे अंतर का पता चलता है जब कंपनियों की लागत बढ़ी लेकिन दिल्ली बिजली विभाग की तरफ से टैरिफ समय पर संशोधित नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार यह राशि अब उपभोक्ताओं से लेवलवाइज तरीके से वसूली जाएगी।
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क्या है APTEL आदेश और नियामकीय स्थिति
APTEL ने DERC को ऐसा निर्देश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर रिकवरी की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने इससे पहले DERC ने अपनी तरफ से तर्क दिया कि तत्काल वसूली से उपभोक्ताओं पर अचानक फाइनेंशियल बोझ बढ़ सकता है। हालांकि न्यायिक आदेश से स्पष्ट होता है कि अब देरी संभव नहीं है इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी 2025 में यह संकेत दे चुका था कि 2024 से 2028 के दौरान इस बकाया राशि को वसूल लेना चाहिए।
क्या है बिजली बढ़ोतरी के प्रमुख कारण
प्राप्त जानकारी के अनुसार Delhi Electricity की दरों पर दबाव के पीछे कई प्रमुख कारण भी है कोयला और ऊर्जा खरीद लागत में वृद्धि होना, ट्रांसमिशन और वितरण खर्चे में लगातार बढ़ोतरी होना, कई सालों तक टैरिफ में सीमित संशोधन किया जाना साथ ही सब्सिडी और वास्तविक लागत के बीच ज्यादा अंतर होना आदि। इन सभी कारकों ने मिलकर रेगुलेटरी असेट्स को बढ़ा दिया है जो अब फाइनेंशियल स्थिरता के लिए वसूला जाना जरूरी है।
क्या होगा उपभोक्ताओं और निवेशकों पर असर
उपभोक्ताओं के लिए इसका अर्थ है कि आने वाले सालों में बिजली बिल में धीरे-धीरे वृद्धि होना। जानकारी के मुताबिक ये बोझ 5 से 7 सालों में फैलाया जा सकता है जिससे तत्काल झटका सीमित समय के लिए ही रहे। जानकारी के मुताबिक मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसाय सबसे अधिक इससे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं वहीं बिजली वितरण कंपनियों के लिए यह कदम नकदी प्रवाह सुधारने और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
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क्या है दिल्ली विद्युत नियामक आयोग के आगे का आउटलुक
आगे काफी हद तक DERC के द्वारा टैरिफ निर्धारण और सरकार की सब्सिडी नीति के बारे में बात की जा रही है। कि यह टैरिफ निर्धारण और सरकार की सब्सिडी पर ही निर्भर करेगी। ब्रोकरेज और सेक्टर विशेषज्ञ के अनुसार अगर सरकार सब्सिडी बढ़ा देती है तो उपभोक्ताओं पर बोझ कम होगाअन्यथा Delhi Electricity की दरों में क्रमिक वृद्धि लगभग तय है।
