एमपी में ऑटोमैटिक बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम लागू, एक क्लिंक में खुलेगी कॉलोनी और बिल्डर की पूरी कुंडली

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने ऑटोमैटिक बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम यानि एबीपीएएस 3.0 लागू कर दिया है, जिससे एक ही प्लेटफॉर्म पर कॉलोनी की वैधता (वैध या अवैध), कॉलोनाइजर का लाइसेंस, और रेरा पंजीकरण जैसी सभी मंजूरियां एक क्लिक में ऑनलाइन उपलब्ध हो गई हैं। इस नए सिस्टम के आने के बाद अब लोग घर बैठे सिर्फ एक क्लिक से यह जांच सकेंगे कि जिस कॉलोनी में वे प्लॉट या फ्लैट ले रहे हैं, वह वैध है या अवैध।

विधानसभा की पटल में रखा जाएगा कानून

विधानसभा के मानसून सत्र में कॉलोनाइजर एक्ट को मंजूरी मिलने के बाद यह एडवांस सिस्टम पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। इस नए प्लेटफॉर्म पर कॉलोनाइजर लाइसेंस, रेरा रजिस्ट्रेशन और अन्य संबंधित विभागों की मंजूरियों को एक साथ इंटीग्रेटेड किया जा रहा है, जिससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।

प्रमुख बातें

रेरा वेबसाइट पर किसी भी प्रोजेक्ट की जांच करने से खरीदार को बिल्डर का नाम, प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर, मंजूरियां, निर्माण की प्रगति और तय पजेशन की तारीख जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां आसानी से मिल जाती हैं। यदि आप किसी संपत्ति को खरीदने की सोच रहे हैं, तो रेरा पंजीकरण की जांच इस तरह से कर सकते है।

रेरा वेबसाइट- मध्य प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ और प्रोजेक्ट्स सेक्शन में बिल्डर का नाम या रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें।
दस्तावेज़ों का मिलान- डेवलपर के ब्रोशर पर दिए गए खसरा नंबर और प्लॉट की संख्या का मिलान संबंधित विकास प्राधिकरण या रेरा पर अपलोड किए गए स्वीकृति पत्र से करें।
सड़क और पार्क- एक वैध कॉलोनी के लिए मानकों के अनुसार पार्कों और 9 मीटर (लगभग 30 फीट) से चौड़ी सड़कों का आरक्षित होना अनिवार्य है।“रेरा पोर्टल पर किसी भी रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध रहती है। यहां बिल्डर का नाम, प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर, मंजूरियां, निर्माण की प्रगति और तय पजेशन की तारीख जैसी जानकारियां देखी जा सकती हैं। इससे खरीदार को पता चल जाता है कि क्या आप मध्य प्रदेश में कोई प्रॉपर्टी खरीदने का विचार कर रहे हैं?

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