Social Media Ban for Kids: क्या आने वाले समय में दुनियाभर के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाकर जो शुरुआत की थी, अब कई दूसरे देश भी उसी राह पर चलते दिखाई दे रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के बाद यूएई समेत कई देशों ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने का फैसला किया है, जबकि कई अन्य देश भी ऐसे कानून बनाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि इस तरह के नियमों पर 20 से ज्यादा देशों में चर्चा चल रही है। भारत में भी इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले की सराहना की थी, जिसके बाद यह अटकलें लगने लगी हैं कि भारत सरकार भी भविष्य में इस दिशा में कदम उठा सकती है।
5 देशों में नियम लागू, कई और देशों में तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया के पांच देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने के नियम लागू हो चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर 2025 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है। चीन में नाबालिगों पर इस तरह की पाबंदियां पहले से लागू हैं। इंडोनेशिया ने मार्च 2026 में ऐसा कानून लागू किया, जबकि मलेशिया भी इसी तरह के नियम लेकर आया है। तुर्की इस साल के आखिर तक और यूएई अगले साल से ऐसे नियम लागू करने की तैयारी में हैं।
कई और देश भी बना रहे हैं कानून
यूके, ग्रीस और स्वीडन ने भी आने वाले वर्षों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की योजना बनाई है। वहीं कनाडा और नॉर्वे इसी साल इस संबंध में कानून ला सकते हैं। जर्मनी, डेनमार्क, आयरलैंड, ऑस्ट्रिया और स्लोवेनिया जैसे देशों ने भी संकेत दिए हैं कि वे इस दिशा में कदम उठा सकते हैं। इसके अलावा फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन और इटली में भी इस मुद्दे पर चर्चा जारी है।
बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक क्यों लगाई जा रही है?
इन नियमों के पीछे सबसे बड़ी वजह बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में तनाव, चिंता, डिप्रेशन, नींद की कमी और मोटापे जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है। इसलिए कई सरकारें बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सख्त कदम उठा रही हैं।
हालांकि, इस फैसले से सभी लोग सहमत नहीं हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ बैन लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। उनका कहना है कि बच्चे दूसरे तरीकों से भी सोशल मीडिया तक पहुंच सकते हैं, इसलिए जागरूकता और डिजिटल शिक्षा भी उतनी ही जरूरी है।




