Uttar Pradesh Politics : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने नई रणनीति बनाई है। पार्टी ने दलित नेता को प्रदेश का प्रभारी बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया है। पिछले तीन दशकों के बाद पहली बार कांग्रेस ने किसी दलित नेता को प्रदेश प्रभारी बनाया है। जिससे उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस ने दलित वर्ग के नेता को यूपी प्रभारी बनाया
दरअसल, पिछले कई सालों से कांग्रेस उत्तर प्रदेश की राजनीति से बाहर थी। अकेले या समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस अब अपनी वापसी की कोशिश में है। अब उसने दलित वर्ग को अपने साथ जोड़ने के लिए एक दलित नेता राजेन्द्र पाल गौतम को प्रदेश का प्रभारी बनाया है। इससे पहले कांग्रेस ने सुशील शिंदे को प्रदेश प्रभारी बनाया था, जो 90 के दशक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा नियुक्त किए गए थे। अब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने अविनाश पांडेय को हटाकर गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है।
अंबेडकरवादी विचारधारा के नेता हैं राजेंद्र पाल
बता दे कि गौतम अंबेडकरवादी और सामाजिक न्याय की राजनीति के लिए जाने जाते हैं। वह बसपा के संस्थापक कांशीराम के साथ भी काम कर चुके हैं। गौतम ने बसपा के बाद आम आदमी पार्टी में भी शामिल हुए थे और दिल्ली सरकार में मंत्री रहे हैं। हाल ही में वह मायावती से मिलने गए थे, लेकिन उनसे नहीं मिल पाए। कहा जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बसपा के गठबंधन को लेकर बातचीत कर रहे थे।
कांग्रेस ने दलित नेता को प्रभारी क्यों बनाया?
पिछले तीन दशकों में कांग्रेस ने दलित नेताओं को प्रभारी बनाया है। पहले सुशील कुमार शिंदे ही दलित नेता थे, उसके बाद से सवर्ण या मुसलमान नेताओं को प्रभारी बनाया गया। दरअसल, प्रियंका गांधी के बाद अविनाश पांडेय को प्रदेश प्रभारी बनाया गया था। अविनाश पांडेय के कार्यकाल में कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत बनाने में वह सफल नहीं हो सके। अविनाश पांडेय का कामकाज भी अच्छा नहीं माना जाता है।
बताया जा रहा है कि उनके साथ संगठन के नेताओं का तालमेल भी अच्छा नहीं था। इससे नाराज होकर पार्टी ने अब राजेंद्र पाल गौतम पर भरोसा जताया है।
राहुल गाँधी ने राजेंद्र पाल गौतम को दी बड़ी जिम्मेदारी
कांग्रेस ने राजेंद्र पाल गौतम को अनुसूचित जाति मोर्चा का प्रमुख बनाया है। राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है। गौतम दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के संगठनों में अच्छी पहचान रखते हैं। गौतम दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और आम आदमी पार्टी में भी मंत्री रहे हैं। लेकिन अयोध्या मामले में उनकी टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ विरोध भी हुआ था। अब वह उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य का प्रभार संभालेंगे, जहां पिछड़ा और दलित वर्ग राजनीति का मुख्य केंद्र हैं। कांग्रेस भी इन्हीं वर्गों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है।
अभी कांग्रेस में और होगा बदलाव
इसके साथ ही, अजय राय के भी बदलाव की बात चल रही है। संभावना है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर जातीय संतुलन बनाने के लिए नेता बदल दिए जाएं। इस समय पार्टी में यह चर्चा तेज है कि आराधना मिश्रा और राकेश राठौर जैसे नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। अजय राय भूमिहार हैं, इसलिए उनके बदले जातीय समीकरण भी देखे जा रहे हैं। कुछ नेता यह भी मानते हैं कि मायावती से मुलाकात का प्रयास भी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत बनाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। दलित नेताओं को जिम्मेदारी देकर वह वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। सभी राजनीतिक दल इस समय उत्तर प्रदेश में अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।




