इंदौर। भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायमूर्ति गणों ने शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस – इन्हेंसिंग एक्सेस जस्टिस के उद्घाटन सत्र का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने नालसा की शिक्षा स्कीम तथा नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लाँच किया। कॉन्फ्रेंस में नालसा के थीम सॉन्ग का प्रदर्शन कर इसकी योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन किया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य सभी अतिथियों ने जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स – विवाद से सहमति की ओर का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल सहित अन्य न्यायमूर्तियों ने कॉन्फ्रेंस में आयोजकों द्वारा तैयार की गई न्याय के स्वर नामक पुस्तक का विमोचन किया।
संवाद से ही न्याय संभव
सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2 पक्षों में विवाद के हल में संवाद की प्रक्रिया अनेक विचारों से एकमत या आवाज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सबके न्याय की पहुंच सिर्फ कानून के आधार पर तैयार नहीं हो सकती है। यह संवाद से ही संभव है। न्याय की प्रक्रिया केवल न्यायपालिका या किसी एक संस्था से पूरी नहीं होती है। इस यज्ञ में सबको मिलकर आहूति देनी होती है। सीजेआई ने अहिल्याबाई होल्कर की चर्चा करते हुए कहा कि लोकमाता के लिए न्याय सबके लिए समान अधिकार था। वे इकलौती महिला शासक थीं, जो प्रतिदिन नागरिकों, किसानों और विधवाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान करती थीं। वे सीधे नागरिकों से संवाद करती थीं, उनके शासनकाल में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था। इंदौर नगरी में इस सम्मेलन के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बधाई का पात्र है।
न्याय पाना हर व्यक्ति का अधिकार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि न्याय पाना इस धरती में जन्मे हर व्यक्ति का प्राथमिक और मानवीय अधिकार है। एक जागरूक नागरिक के रूप में यह हमारा कर्तव्य भी है कि हम समाज के हर उस पीड़ित व्यक्ति या समुदाय को न्याय के मंदिर तक न केवल पहुंचाए, वरन् उसे न्याय भी दिलवाएं जो न्याय पाने का वास्तविक अधिकारी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि हमारी न्याय व्यवस्था ऐसी हो, जो सर्वव्यापी हो, सुलभ हो, सुगम हो, शीघ्र हो, सस्ती हो, समदर्शी हो और सबसे जरूरी यह कि न्याय मानवीय संवेदनाओं से भरा हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने की दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। आज के इस पवित्र आयोजन की थीम – एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन के माध्यम से न्याय पहुंचाना है। न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व को लोकतंत्र का आधार बनाया गया है।
ऐसा है आयोजन
यह कॉन्फ्रेंस 9 अगस्त तक चलेगी। कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली (नालसा), मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर (सालसा) और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस 2 दिवसीय कॉन्फ्रेंस का विषय इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस तथा इसकी थीम एकजुट आवाज, सशक्त भविष्य संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच रखी गयी है।




