उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी में माता शिप्रा का अविरल प्रवाह है और उनकी आरती प्रतिदिन होती है, लेकिन शिप्रा आरती को लेकर विवाद सामने आ रहा है। जानकारी के तहत महाकाल मंदिर प्रबंध समिति और पंडा-पुरोहित में न सिर्फ तनातनी हो गई, बल्कि मामला हाथपाई तक पहुच गया। प्रशासन अब इस विवाद को सुलझाने में लगा हुआ है। जिससे यहां की व्यवस्था में किसी भी तरह की अव्यवस्थ न हो सकें। रामघाट क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
महाकाल मंदिर समिति की दखल पंडा-पुरोहित को स्वीकार नही
बताया जा रहा है कि रामघाट पर तीर्थ पुरोहित द्वारा वर्षो से मां शिप्रा की आरती करते आ रहे है, लेकिन इस आरती को भव्य स्वरूप देने के लिए महाकाल मंदिर प्रबंध समिति इस पर हस्ताक्षेप कर रही है। समिति यह चाहती है कि हरिद्वार, अयोध्या और काशी की तर्ज पर शिप्रा आरती का भव्य स्वरूप हो। इसलिए समिति ने निणर्य लिया है कि जिस स्थान पर भगवान महाकाल की पालकी का पूजन होता है, वहीं से मंदिर आरती शुरू हो। इसी निर्णय के तहत जब महाकाल मंदिर समिति के बटुक रामघाट पर आरती की तैयारी के लिए पाट बिछाने पहुंचे, तो पंडा समिति के पुरोहितों ने इसका विरोध किया।
बेदखल करने की साजिश
पंडा समिति का कहना है कि वे साल 2015 से आरती करते आ रहे है और इसकों भव्य स्वरूप दिए है, लेकिन अब आरती का स्वरूप बदलने के बहाने उन्हे बेदखल किया जा रहा है। पुरोहितों की दो प्रमुख मांगें है, जिनमें बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए और महाकाल मंदिर में पुरोहितों को भी नियमित पूजन की अनुमति दी जाए।




