ऑस्कर अवार्ड की दिलचस्प कहानी

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About Oscar Award In Hindi :क्या आपको पता है 1927 में 36 लोगों की कमेटी ने (AMPAS) यानी ‘एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ की स्थापना की थी और इसका पहला समारोह 16 मई 1929 को रूजवेल्ट होटल में महज़ 15 मिनट का था।

ऑस्कर नाम के पीछे की वजह :-

इस ओस्कार अवार्ड का नाम ऑस्कर कैसे पड़ा इसके पीछे कई कहानियाँ हैं जिनमें से सबसे मशहूर हैं कि एकेडमी की लाइब्रेरियन मार्गरेट हेरिक जो बाद में कार्यकारी निदेशक बनीं उन्होंनें प्रतिमा को देखकर कहा था कि ये तो मेरे ‘अंकल ऑस्कर’ जैसी दिख रही है और तभी इसका नामकरण हो गया और ऑस्कर नाम मिला हालाँकि आधिकारिक तौर पर इसे एकेडमी अवार्ड ऑफ मेरिट नाम दिया गया है, लेकिन ये प्रतिमा अपने उपनाम ऑस्कर से ज़्यादा मशहूर हुई है फिर भी एकेडमी ने 1939 तक इस उपनाम को आधिकारिक तौर पर नहीं अपनाया था।

आपको ये भी बताते चलें कि ऑस्कर भारत का गौरव तब बना जब 1983 में भानू अथैया ये अवॉर्ड पाने वाली पहली भारतीय बनीं उन्होंनें ये अवार्ड ‘गाँधी’ फिल्म के लिए कॉस्टयूम डिज़ाइन करने के लिए हासिल किया था। ये अवार्ड दुनिया भर में फिल्म निर्माण की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है।पूरे विश्व के सिनेमा में अलग-अलग कैटेगरी में बेहतरीन कार्य को सम्मानित करने के लिये दिया जाता है।

तो चलिए एक नज़र डालते हैं इसके इतिहास पर


दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफी ऑस्कर पाने की ललक फिल्म से जुड़े हर कलाकार को होती है और इसे 1929 से महान फिल्म निर्माताओं ने हासिल भी किया पर क्या आप जानते हैं इस सम्मान के बनने के पीछे की कहानी ,उसकी सोच को नहीं तो आइये जानते हैं –

तो हुआ यूँ कि 1927 में एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज के गठन के कुछ ही समय बाद, नवगठित संगठन ने अपने लक्ष्य निर्धारित करने के लिए लॉस एंजिल्स के डाउनटाउन स्थित बिल्टमोर होटल के क्रिस्टल बॉलरूम में एक रात्रिभोज रखा जिसमें कई विषयों पर चर्चा भी हुई,जिनमें एक विषय ये भी था कि उत्कृष्ट फिल्म निर्माण उपलब्धियों को सर्वोत्तम तरीके से कैसे सम्मानित किया जाए और इस प्रकार मोशन पिक्चर निर्माण के सभी पहलुओं में उत्कृष्टता को कैसे प्रोत्साहित किया जाए।

वार्षिक पुरस्कार शुरू करने पर सहमति जताते हुए, समूह ने एक भव्य ट्रॉफी बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। एमजीएम के कला निर्देशक सेड्रिक गिबन्स ने एक फिल्म रील पर खड़े एक योद्धा की प्रतिमा का डिज़ाइन तैयार किया, जिसके हाँथ में एक योद्धा की तलवार थी। अकादमी ने लॉस एंजिल्स के मूर्तिकार जॉर्ज स्टेनली को इस डिज़ाइन को त्रि-आयामी रूप देने के लिए नियुक्त किया – और इस तरह विश्व प्रसिद्ध प्रतिमा का जन्म हुआ।

ऑस्कर

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि 16 मई, 1929 को हॉलीवुड रूजवेल्ट होटल के ब्लॉसम रूम में आयोजित पहले पुरस्कार समारोह के बाद से अब तक 3,000 से अधिक प्रतिमाएं प्रदान की जा चुकी हैं। ये भी बता दें कि हर जनवरी माह में, न्यूयॉर्क की हडसन घाटी में स्थित पोलिच टैलिक्स फाइन आर्ट फाउंड्री में नई स्वर्ण प्रतिमाएं ढाली जाती हैं।

ऑस्कर प्रतिमा 13½ इंच ऊंची है और इसका वजन 8½ पाउंड है। फिल्म रील में पाँच तीलियाँ हैं, जो अकादमी की पाँच मूल शाखाओं का प्रतीक हैं जैसे -अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, तकनीशियन और लेखक। हालांकि प्रतिमा अपने मूल डिजाइन के अनुरूप ही है, लेकिन आधार का आकार 1945 तक बदलता रहा, और उसके बाद वर्तमान मानक को अपनाया गया।

किस चीज़ से बनीं है प्रतिमा :-

ये प्रतिमा ठोस कांसे की बनी हैं और उन पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ी है ,एक ख़ास बाद ये कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान धातु की कमी के कारण, ऑस्कर पुरस्कार तीन वर्षों तक रंगे हुए प्लास्टर से बनाए गए थे और युद्ध के बाद, अकादमी ने पुरस्कार विजेताओं को प्लास्टर की प्रतिमाओं के बदले सोने की परत चढ़ी धातु की प्रतिमाएं प्राप्त करने का निमंत्रण दिया था।

डिज़ाइन: –

इसके डिज़ाइन की बात करें तो इसमें रील पर खड़े योद्धा का चित्रण है जो हाँथ में तलवार लेकर खड़ा है और इसे ये आकार दिया था जॉर्ज स्टेनली ने। फिल्म की रील पर खड़े एक योद्धा की शैलीबद्ध आकृति, जिसके हाथ में क्रूसेडर की तलवार है, और पांच तीलियां अकादमी की पांच मूल शाखाओं (अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, तकनीशियन और लेखक) का प्रतीक हैं। एमजीएम के कला निदेशक सेड्रिक गिबॉन्स ने ऑस्कर प्रतिमा का शुरुआती डिज़ाइन तैयार किया था। ऑस्कर ट्रॉफी तैयार करने के लिए उन्हे एक मॉडल की ज़रूरत थी और फर्नाडे को प्रतिमा के लिए मॉडल बनाए जाने की बात कही। आरंभ में फर्नाडे मॉडल बनने के लिए राजी नहीं थे, पर अंतत: वह इसके लिए न्यूड पोज देने पर सहमत हो गए। जार्ज स्टेनले नामक मूर्तिकार ने पहले क्ले से ऑस्कर प्रतिमा तैयार की, बाद में इसी की तर्ज़ पर धातु की गोल्ड प्लेटेड ऑस्कर प्रतिमा तैयार की गई।

क्यों किया गया क्ले का इस्तेमाल :-

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तीन साल तक धातु के बजाय क्ले की ऑस्कर प्रतिमा तैयार की गई थी। बाद में पुन: धातु की ऑस्कर प्रतिमा प्रदान करने का चलन शुरू किया गया। वर्ष 1950 से ये क़ानूनी प्रावधान सुनिश्चित किया गया है कि ऑस्कर पुरस्कार विजेता अथवा उसका स्वामित्व रखने वाले शख़्स को ऑस्कर प्रतिमा बेचने का अधिकार नहीं है लेकिन अगर वे चाहे, तो धन के बदले अकादमी को ऑस्कर प्रतिमा लौटा सकते है। यूएपी पोलिच टैलिक्स निर्माण में लगने वाले समय की बात करें तो 50 मूर्तियाँ बनाने के लिए 3 महीने का समय लगता हैं।

प्रथम पुरस्कार विजेता और देरी :- 


ऑस्कर अवार्ड पाने वाले पहले विजेता हैं ,एमिल जैनिंग्स, जिन्हें 1929 में “द लास्ट कमांड” और “द वे ऑफ ऑल फ्लेश” में उनके अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया था।ऑस्कर पुरस्कारों के अब तक के इतिहास में मात्र तीन बार पुरस्कारों का आयोजन समय पर नहीं हो सका। पहला मौक़ा था जब 1938 में लॉस ऐंजिल्स में भारी बाढ़ के कारण ऑस्कर पुरस्कार समारोह एक हफ्ते देरी से आयोजित किया गया। इसके बाद 1968 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्या के कारण शोक में पुरस्कार समारोह का आयोजन 8 अप्रैल के बजाय 10 अप्रैल को किया गया फिर 1981 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की हत्या के प्रयास के कारण तीसरी बार ऑस्कर पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन निर्धारित समय से 24 घंटे देरी यानी एक दिन की देरी से किया गया।

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