Annamalai Resigns BJP: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई (K. Annamalai Left BJP) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अन्नामलाई ने अपना इस्तीफा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (BJP President Nitin Naveen) को सौंपा, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया है। इस फैसले ने तमिलनाडु ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति में भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि अन्नामलाई ने इस्तीफा देने से महज तीन दिन पहले दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात की थी। इसके बाद से ही उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।
नई पार्टी बनाने की तैयारी?
सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई भाजपा से टकराव के बजाय सम्मानजनक तरीके से अलग होना चाहते थे। अब वे तमिलनाडु में ‘राष्ट्रवादी-तमिल दर्शन’ (Rashtravadi Tamil Darshan) पर आधारित एक गैर-राजनीतिक आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि जनसमर्थन मिलने पर यही आंदोलन आगे चलकर एक नई राजनीतिक पार्टी का रूप ले सकता है।
अन्नामलाई 7 जून को अपने प्रमुख समर्थकों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें आगे की रणनीति और नए राजनीतिक रोडमैप पर चर्चा हो सकती है।
बीजेपी और अन्नामलाई के बीच क्यों बढ़ी दूरी?
पिछले कुछ महीनों में भाजपा और अन्नामलाई के बीच मतभेद के कई संकेत सामने आए थे।
- विधानसभा चुनाव से पहले अन्नामलाई को हटाकर नैनार नागेंद्रन को तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष बनाया गया।
- अन्नामलाई ने खुद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा।
- उन्होंने CBSE की तीन-भाषा नीति को तत्काल लागू करने पर सवाल उठाए थे।
- AIADMK के साथ भाजपा के गठबंधन को लेकर भी वे पूरी तरह सहमत नहीं बताए जाते थे।
हालांकि इन सबके बावजूद उन्होंने चुनाव में NDA के लिए प्रचार किया था।
भाजपा को कितना नुकसान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई के जाने से भाजपा को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
1. युवाओं में पकड़ कमजोर पड़ सकती है
अन्नामलाई ने खुद को युवा और आक्रामक नेता के रूप में स्थापित किया था। सोशल मीडिया और शहरी युवाओं के बीच उनकी अच्छी लोकप्रियता थी।
2. तमिलनाडु में सबसे बड़ा चेहरा खोना
पिछले कई वर्षों से अन्नामलाई ही राज्य में भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा थे। फिलहाल उनके बराबर जनस्वीकार्यता वाला दूसरा नेता पार्टी में नजर नहीं आता।
3. DMK विरोधी राजनीति पर असर
DMK सरकार के खिलाफ सबसे मुखर आवाज अन्नामलाई ही रहे हैं। उनके हटने से भाजपा की विपक्षी धार कमजोर पड़ सकती है।
लेकिन नुकसान नहीं भी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तमिलनाडु में भाजपा का एक बड़ा वोट बैंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर आधारित है। इसके अलावा AIADMK जैसे सहयोगी दल NDA के साथ बने रहते हैं तो संगठनात्मक नुकसान की भरपाई हो सकती है।
अब सबसे बड़ी नजर 7 जून की बैठक पर है। अगर अन्नामलाई नई राजनीतिक पार्टी या आंदोलन का ऐलान करते हैं तो तमिलनाडु की राजनीति में एक नया समीकरण बन सकता है। खासकर युवा वोटरों और DMK विरोधी मतदाताओं पर इसका असर देखने को मिल सकता है।




