world environment day भारत में द्विआयामी है पर्यावरण, वायु प्रदूषण, जल संकट और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी गंभीर है चुनौतिया

world environment day। भारत में पर्यावरण की स्थिति द्विआयामी है। एक ओर वनों के संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर ऊर्जा) के मामले में देश ने अभूतपूर्व प्रगति की है और दुनिया के 70 प्रतिशत से अधिक बाघ भारत में सुरक्षित हैं। वहीं दूसरी ओर, तेजी से हो रहे औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण वायु प्रदूषण, जल संकट और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। देश हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
भारत ने अपने गैर-जीवाश्म ईंधन लक्ष्यों की दिशा में भारी वृद्धि की है, जिससे सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में जबरदस्त उछाल आया है। भारत की पारिस्थितिकी संरक्षण और वन्यजीव नीतियां काफी मजबूत रही हैं। प्रोजेक्ट टाइगर के अथक प्रयासों से देश में बाघों की संख्या तेजी से बढ़कर 3,600 के पार पहुंच गई है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी संरक्षणकर्ता बन गया है।

चुनौतियां

वायु प्रदूषण- आईईए और विश्व बैंक की रिपोर्टों के अनुसार, वायु प्रदूषण देश के प्रमुख स्वास्थ्य संकटों में से एक है। दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से कई शहर भारत (विशेषकर उत्तरी भारत) में हैं, जिससे औसत जीवन प्रत्याशा पर असर पड़ता है। सतही जल और भूजल का अत्यधिक दोहन तथा औद्योगिक कचरे का नदियों में मिलना एक बड़ी समस्या है, जिसकी निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे निकाय करते हैं।

168वें स्थान पर भारत

सतत विकास लक्ष्यों के संबंध में इसका समग्र स्कोर 100 में से 61.9 है। पर्यावरण रिपोर्ट से पता चला है कि पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (ईपीआई) में भारत 180 देशों में से 168वें स्थान पर है। ईपीआई की गणना पर्यावरण, स्वास्थ्य, जलवायु, वायु प्रदूषण, स्वच्छता, जैव विविधता आदि जैसे विभिन्न संकेतकों के आधार पर की जाती है।

सीबीडी संधि में शामिल है भारत

भारत का पर्यावरण विश्व के कुछ सबसे अधिक जैव विविधता वाले पारिस्थितिक क्षेत्रों से मिलकर बना है। दक्कन ट्रैप, गंगा के मैदान और हिमालय प्रमुख भौगोलिक विशेषताएं हैं। देश में प्रदूषण के विभिन्न रूप प्रमुख पर्यावरणीय समस्या हैं और विकासशील राष्ट्र होने के कारण यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील है। भारत में पर्यावरण संरक्षण के लिए कानून हैं और यह जैव विविधता पर सम्मेलन ( सीबीडी) संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में से एक है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और प्रत्येक राज्य के वन विभाग पूरे देश में पर्यावरण नीतियों की योजना बनाते और उन्हें लागू करते हैं।

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