रीवा के सिरमौर चौराहा स्थित संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन व विकास कार्यालय के सामने मऊगंज से निलंबित उपयंत्री राजेश सिंह ने सोमवार से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान जीवन निर्वाह भत्ता न मिलने से नाराज उपयंत्री अब पूरी तरह आक्रोशित हैं। उनका आरोप है कि विभाग उन्हें और उनके परिवार को भूखा मारने की साजिश रच रहा है, जिसके विरोध में वे सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं।
पेट की आग बुझाने के लिए मांगनी पड़ी थी भीख
निलंबित उपयंत्री राजेश सिंह ने खुलासा किया कि विभाग द्वारा भत्ता रोके जाने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात इस कदर बदतर हो गए कि बीती 12 जून को उन्हें अपने पेट की आग बुझाने के लिए रीवा की सड़कों पर कटोरा लेकर भीख तक मांगनी पड़ी थी। इस संवेदनशील मामले के तूल पकड़ने के बाद विभागीय उच्च अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया था और पांच दिनों के भीतर उनका रुका हुआ जीवन निर्वाह भत्ता दिलाने का लिखित व मौखिक आश्वासन दिया था।
खोखला साबित हुआ अधिकारियों का आश्वासन
राजेश सिंह का कहना है कि अधिकारियों द्वारा दिया गया आश्वासन महज एक खोखला वादा साबित हुआ। तय समय सीमा बीत जाने के कई दिनों बाद भी जब उन्हें भत्ता नहीं मिला, तो उनका सब्र का बांध टूट गया। अधिकारियों की वादाखिलाफ़ी से नाराज होकर उन्होंने सोमवार को धरना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल जाता, वे यहां से नहीं हटेंगे।
विभाग ने दी सफाई: मुख्यालय से नदारद थे उपयंत्री
इस पूरे हाई-प्रोफाइल ड्रामे और आरोपों पर विभागीय अधिकारियों ने भी अपनी सफाई पेश की है। नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उपयंत्री को निलंबित करने के बाद नियमानुसार एक निश्चित मुख्यालय अटैच किया गया था। लेकिन निलंबन के बाद से उपयंत्री तय मुख्यालय में अपनी अनिवार्य हाजिरी दर्ज नहीं करा रहे थे। नियमों के मुताबिक, बिना उपस्थिति प्रमाणित हुए जीवन निर्वाह भत्ता जारी नहीं किया जा सकता, इसी वजह से यह तकनीकी स्थिति निर्मित हुई है।




