रीवा: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर NSUI ने फूंका चुनाव आयोग का पुतला, मनगवां में कांग्रेस का धरना

NSUI burns effigy of the Election Commission following the cancellation of Meenakshi Natarajan's nomination.

रीवा। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त किए जाने के बाद विंध्य क्षेत्र सहित पूरे रीवा जिले में सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। इस फैसले से आक्रोशित कांग्रेस और उसके छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने बुधवार को सड़कों पर उतरकर जोरदार मोर्चा खोल दिया। रीवा शहर के व्यस्ततम कॉलेज चौराहे पर जहाँ एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करते हुए उसका प्रतीकात्मक पुतला दहन किया, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर मनगवां तहसील परिसर में कांग्रेस नेताओं ने एक दिवसीय धरना और उपवास रखकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ कार्रवाई, भाजपा के दोहरे चरित्र पर उठाए सवाल

शहर के कॉलेज चौराहे पर हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र-राज्य सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया। पंकज उपाध्याय ने सत्तापक्ष को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाया कि बीजेपी पहले जनादेश की अनदेखी करती है, फिर विपक्षी विधायकों को तोड़ने का प्रयास करती है; और जब इन सबमें उन्हें सफलता नहीं मिली, तो साजिश के तहत कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन ही निरस्त करा दिया गया।

आदिवासी महिला नेतृत्व को रोकने की निंदनीय कोशिश

NSUI प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई नेतृत्व ने महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक तरफ भाजपा महिला आरक्षण की बात कर ढिंढोरा पीटती है, और दूसरी तरफ एक योग्य आदिवासी महिला नेतृत्व को राज्यसभा पहुंचने से रोकने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की महिला की लोकतांत्रिक भागीदारी को इस तरह बाधित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है, जो सत्ता पक्ष के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर कहा कि इस घटनाक्रम से देश की निष्पक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख और गरिमा पर गहरे सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

मनगवां में कांग्रेसियों का उपवास, आर-पार की लड़ाई की चेतावनी

इधर, मनगवां तहसील कार्यालय में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और वक्ताओं ने इस फैसले को लोकतंत्र की भावना पर सीधा आघात बताया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की। कॉलेज चौराहे पर पुतला दहन के दौरान युवाओं ने जमकर नारेबाजी की और देश के संविधान व लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया। एनएसयूआई और कांग्रेस नेताओं ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि आदिवासी समाज, युवाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनका यह संघर्ष सड़कों से लेकर सदन तक आगे भी जारी रहेगा।

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