भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सोना बेचने से संबंधित रिपोर्ट को गलत बताया है। हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया कि आरबीआई ने मई 2026 के दौरान अपने gold reserve का एक बड़ा हिस्सा बेचकर विदेशी मुद्रा भंडार को सपोर्ट किया है। हालांकि केंद्रीय बैंक में स्पष्ट बताया कि उसकी कुछ सोने की होल्डिंग में कोई कमी नहीं आई है और ऐसे दावे तथाआत्मक रूप से गलत है। इस स्पष्टीकरण का असर फाइनेंशियल बाजार और निवेश करने लोगों की धारणा पर देखने को मिल रहा है।

RBI Gold Reserve को लेकर क्या है दावा?
Bloomberg Economics की प्राप्त रिपोर्ट की जानकारी में ऐसा अनुमान लगाया गया है कि आरबीआई ने विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट को नियंत्रित करने के लिए लगभग 12 अरब डालर मूल्य का सोना बेचा हो ऐसा हो सकता है। क्या आकलन आरबीआई के साप्ताहिक रिजर्व आंकड़ों में दर्ज बदलाव के आधार पर किया गया था। केंद्रीय बैंक में रुपए पर दबाव और वैश्विक अनिश्चित के बीच अपने सोने को रिजर्व करने का उपयोग किया है। हालांकि रिपोर्ट में एक विश्लेषणात्मक अनुमान में बताया गया है ना की कोई आधिकारिक पुष्टि दी गई है।
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RBI ने जारी किया है स्पष्ट बयान
आरबीआई में इन अटकलें को खारिज करते हुए बताया कि उसकी भौतिक सोने की होल्डिंग 880 पॉइंट 52 टन पर स्थिर बनी हुई है। केंद्रीय बैंक के ऑफिशियल बयान में बताया गया कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सोना बेचने की खबरें सही नहीं है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों में दर्ज मूल्य के परिवर्तन को सीधा सोनी बेचने को जोड़ना उचित नहीं है क्योंकि इंटरनेशनल बाजार में सोने की कीमत और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव होता है।
Gold Reserve के मूल्य में बदलाव क्यों दिख रहा?
स्टॉक एक्सचेंज और केंद्रीय बैंक के अध्ययन करने वाले विशेषण के मुताबिक gold reserve करने का मूल्य केवल भौतिक मात्रा पर निर्भर नहीं करताहै। सोने के वैश्विक कीमतों में बदलाव डॉलर की मजबूती या कमजोरी तथा रिजर्व पर संपत्तियों के ऊपर मूल्यांकन के कारण भी आंकड़ों में परिवर्तन देखने को मिलता है। यही कारण है की कुल मूल्य में बदलाव का अर्थ हमेशा सोने की बिक्री नहीं हो सकती है।
निवेशकों और बाजार के लिए क्या संकेत हैं?
RBI के द्वारा दिया जाने वाले स्पष्टीकरण निवेशक के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है क्योंकि इससे केंद्रीय बैंक की रिजर्व प्रबंधन प्लानिंग को लेकर स्पष्टता मिलती है। भारत का सोना भंडार अभी भी मजबूत लेवल पर बना हुआ है और इसे दीर्घकालिक प्लानिंग परिसंपत्ति के रूप में भी हम देख सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आरबीआई द्वारा जारी ऑफिशियल जानकारी को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए जबकि विश्लेषणात्मक रिपोर्ट को अनुमान के रूप में ही हमें देखना चाहिए।
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अब आगे क्या रहेगा फोकस?
आने वाले सप्ताह में निवेश करने वाले लोगों की नजर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार रुपए की चाल और वैश्विक कमोडिटी बाजार पर देखने को मिल सकती है अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिलता है तो रिजर्व आंकड़ों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। लेकिन फिलहाल आरबीआई ने गोल्ड रिजर्व की बिक्री की संभावना से साफ इनकार कर दियाहै।




