भारत के सबसे बड़े बैंक HDFC Bank के share में मंगलवार को गिरावट देखी गई है। reuters की रिपोर्ट के सामने आने के बाद बैंक का स्टॉक कारोबार के दौरान करीब 2% तक फिसल चुका है। रिपोर्ट ने बड़े डिपॉजिट को अट्रैक्ट करने के लिए कह गए भुगतान का उल्लेख भी किया गया है। जिससे निवेश करने वाले लोगों की चिंता बढ़ती हुई दिखाई दी है और बैंकिंग शेयर के सेक्टर पर भी इसका असर देखने को मिला है।

HDFC Bank शेयरों में कितना गिरावट
स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार एचडीएफसी बैंक का शेयर इंट्राडे कारोबार में लगभग 2 से 2.5% तक नीचे चला गया है। बिजनेस के दौरान शेयर के निचला स्तर को छुआ, जबकि बाजार बंद होने तक इसमें कुछ भी रिकवरी देखने को मिली है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार बैंक के शेयर में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी किसी भी खबर का असर तेजी से दिखने लगता है क्योंकि निवेश करने वाले लोगों का भरोसा इस सेक्टर में सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर होता है।
ये भी पढ़े: HFCL Share: रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया स्टॉक, 4 महीनों में 172% उछाल..
इसकी रिपोर्ट में क्या कहा गया?
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र की एक सरकारी इंस्टीट्यूट से बड़े डिपॉजिट हासिल करने के लिए कथित तौर पर लगभग 45 करोड रुपए का भुगतान मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया था। हालांकि कंपनी के ऑफिशियल बयान में बताया गया कि बैंक ने सभी आरोपी को खारिज कर दिया है और उसके आंतरिक नियंत्रण प्रणाली भी मजबूत है। केवल इतना ही नहीं बैंक ने यह भी कहा कि उसके सभी लेनदेन नियम के मानक और स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप ही होते हैं। फिलहाल किसी भी नियम के अनुसार एजेंसी की ओर से अंतिम निष्कर्ष या कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।
निवेशकों और बैंकिंग सेक्टर पर क्या है असर
HDFC Bank भारत के बैंकिंग सेक्टर का एक प्रमुख स्टॉक है ऐसे में इसकी शेयर में आई कमजोरी का असर प्राइवेट बैंक के प्रदर्शन पर भी देखने को मिलता है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार निवेश करने वाले लोग फिलहाल बैंक के फाइनेंशियल प्रदर्शन से ज्यादा उसकी कॉरपोरेट गवर्नेंस और मैनेजमेंट की पारदर्शिता पर अपनी नजर रखे हुए हैं।
हालांकि बैंक के बुनियादी फाइनेंशियल संकेतक अभी भी मजबूत बताया जा रहे हैं हाल ही के तिमाही में बैंक ने अनुमान से बेहतर मुनाफा हासिल किया और लोन ग्रोथ भी स्थिर बनी हुई है।
ब्रोकरेज और विश्लेषकों की क्या है राय
मार्केट के विश्लेषकों के अनुसार जब तक किसी भी नियम के जांच का स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आता है तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहतीहै। कई ब्रोकरेज फॉर्म्स का मानना है की लंबी अवधि में बैंक की मजबूत बैलेंस शीट और बड़े रिटर्न नेटवर्क का सपोर्ट बना रह सकता है। हालांकि विशेषज्ञ अभी मानते हैं कि आने वाले समय में निवेश करने वाले लोग RBI या अन्य नियम के संस्थानों के रिएक्शन पर अपना नजर रख सकते हैं।
ये भी पढ़े: ₹70 वाले इस शेयर में खरीदारी की लूट! वजह जान आप भी हो जाएंगे मोहित?
अब आगे क्या देखना होगा?
बाजार सहभागियों के लिए आने वाले दिनों में तीन प्रमुख पहलू अहम होने वाले हैं। संभावित नियम जांच, बैंक की ऑफिशियल सफाई और डिपॉजिट ग्रोथ के आंकड़े इस पर निर्भर करते हैं। अगर मामला केवल रिपोर्ट तक सीमित रहता है और अन्य कोई गंभीर अनियमितया साबित नहीं होती है तो शेयर में स्थिरता का माहौल देखा जा सकता है।




