होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में दो व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास (Iranian Embassy) के उप प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को तलब कर आधिकारिक विरोध दर्ज कराया। भारत ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, हमले का शिकार बने दोनों जहाजों पर 30 भारतीय नाविक (Indian Sailors) सवार थे। इनमें एक भारतीय नागरिक की मौत (Indian sailor killed in Iran attack) हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हुए हैं। भारत सरकार ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
भारत ने हिंसा रोकने और बातचीत की अपील की
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया (West Asia) में लगातार बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, हिंसा रोकने और कूटनीतिक समाधान (Diplomatic Solution) अपनाने की अपील की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (MEA Spokesperson Randhir Jaiswal) ने कहा कि भारत हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही हर हाल में सुनिश्चित होनी चाहिए।
24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय
बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने 24 घंटे निगरानी (24×7 Control Room) की व्यवस्था सक्रिय कर दी है। भारतीय नौसेना (Indian Navy) के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है।
फिलहाल फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में भारत के झंडे वाले 7 व्यापारिक जहाज संचालित हो रहे हैं, जिन पर 148 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
भारत के जहाजों में क्या-क्या शामिल है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय बेड़े में शामिल हैं—
- 3 कंटेनर जहाज (Container Ships)
- 1 कच्चा तेल टैंकर (Crude Oil Tanker)
- 1 ऑयल एवं केमिकल टैंकर (Oil & Chemical Tanker)
- 1 बल्क कैरियर (Bulk Carrier)
- 1 ड्रेजर (Dredger)
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है अहम?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों (Global Shipping Route) में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर भी असर डाल सकता है।




