रीवा। रीवा जिले के त्योंथर न्यायालय के विद्रवान न्यायाधीश ने पास्कों एक्ट के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन प्राकृतिक कारावास की सजा सुनाई है। उस पर आरोप था कि वह 7 से 8 वर्ष की मासूम बच्चियों के साथ गलत काम करता था। जिस पर न्यायालय ने उसके इस कृत्य को गंभीरता पूर्वक लिए और ऐसी सजा सुनाई की वह अब जब तक जीवित रहेगा उसे जेल में रहना पड़ेगा।
यह है मामला
जो जानकारी आ रही है उसके तहत यह पूरा मामला डभौरा थाना क्षेत्र का है। यहां 7 साल की मासूम बच्ची अपने पड़ोसी के घर उसकी बेटी के साथ खेलने गयी थी। जिस पर आरोपी मगलेश्वर केसरवानी द्वारा अपनी बेटी को दुकान भेज दिया और मासूम के साथ गलत काम किया। उस पर यह भी आरोप है कि इसके पूर्व भी दो सगी मासूम बच्चियों के साथ भी इसी तरह से गलत काम किया था। जिस पर डभौरा थाना में परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके पूर्व 10 साल की सुनाई गई थी सजा
जानकारी के तहत विद्वान न्यायधीश ने दुष्कर्म के जिस आरोपी मंगलेश्वर केसरवानी 40 वर्ष निवासी डभौरा को पास्को एक्ट में आजीवन प्राकृतिक कारावास की सजा यानि की मरते दम तक आरोपी को जेल में रहने की सजा सुनाई है, उस पर आरोप है कि आरोपी मंगलेश्वर केसरवानी द्वारा अब तक तीन मासूम बच्चियों के साथ इसी तरह से गलत कर चुका था। जिस पर त्योंथर न्यायालय से 10 साल की सजा सुनाई गई थी। आरोपी मगलेश्वर के पुराने मामलों को देखते हुए इस तीसरे अपराध पर विद्रवान न्यायाधीश ने प्राकृतिक आजीवन कारावास की सजा एवं 5000 के अर्थदंड से दंडित किया है। इस मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक धीरज सिंह द्वारा की गई, जबकि विवेचना उप निरीक्षक रिषभ सिंह बघेल द्वारा की गई।
क्या है आजीवन प्राकृतिक कारावास
कानून में आजीवन प्राकृतिक कारावास का अर्थ है कि दोषी व्यक्ति अपनी बची हुई पूरी प्राकृतिक जिंदगी जेल में बिताएगा। इसमें सामान्य आजीवन कारावास (उम्रकैद) की तरह 14 या 20 साल बाद पैरोल या रिहाई का कोई प्रावधान नहीं होता और दोषी की रिहाई केवल राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा की गई दया याचिका पर ही संभव है। भारतीय न्याय संहिता और भारतीय दंड संहिता के तहत जघन्य अपराधों (जैसे दुर्लभ से दुर्लभतम हत्या या गंभीर बलात्कार के मामले) में अदालतों द्वारा दोषियों को समाज से दूर रखने के लिए प्राकृतिक जीवन के शेष भाग तक जेल की सजा दी जाती है।




