High Temperature से प्रेग्नेंसी में बढ़ता है खतरा, गर्भ में बच्चे की ग्रोथ पर असर?

High temperatures during pregnancy can increase risks and potentially affect the baby's growth in the womb.

बढ़ती गर्मी और उमस अब सिर्फ लोगों की सेहत ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चों के विकास के लिए भी चिंता का विषय है। High Temperature और अधिक नमी के संपर्क में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के बच्चों को ठिगनेपन (Stunting) का खतरा बढ़ सकता है। रिसर्च में भारत समेत दक्षिण एशिया के लाखों बच्चों के आंकड़ों की एनालिसिस की गई है जिसमें गर्भावस्था के दौरान घर मौसम के असर के बारे में विस्तार से बताया गया है।

High temperature during pregnancy can increase risks and potentially affect the baby's growth in the womb.

High Temperature और गर्भ में बच्चे का विकास का संबंध

रिसर्च में प्राप्त जानकारी के अनुसार गर्भावस्था के दौरान लगातार अधिक तापमान और उम्र का सामना करने से भ्रूण के शारीरिक विकास पर असर पड़ता देखा जा सकता है। भारत बांग्लादेश और नेपाल के करीब 2 लाख बच्चों के आंकड़ों की एनालिसिस की गई है जिसमें पाया गया है कि गर्मी का सामना करने वाले मामलों में बच्चों की लंबाई उम्र के हिसाब से कम हो जाती है।

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नमी के साथ बढ़ता जाता है खतरा

इस रिसर्च में केवल तापमान ही नहीं बल्कि नमी को भी शामिल किया गया है इसके लिए वेट बल्ब ग्लोब टेंपरेचर का इस्तेमाल किया गया है। जिससे हमें पता चलता है कि शरीर वास्तव में कितनी गर्मी महसूस करता है इस अध्ययन के अनुसार केवल तापमान की तुलना में गर्मी और उमस का मिला-जुला प्रभाव बच्चों की ग्रोथ पर अधिक गंभीर पाया गया है।

क्यों प्रभावित हो सकता है भ्रूण का विकास होना

अधिक गर्मी में गर्भवती महिलाओं के शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे प्लेसेंटा तक रक्त प्रभाव प्रभावित होने की संभावना हो जाती है जिससे भ्रूण तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति पर असर देखा जाता है। हालांकि इस प्रक्रिया को पूरी तरह समझने के लिए भी और वैज्ञानिक रिसर्च की जरूरत है।

Doctors ने क्या कहा और क्या सावधानी रखे?

डॉक्टर के द्वारा दी जाने वाली जानकारी के अनुसार गर्भवती महिलाओं को गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पीना चाहिए लंबे समय तक धूप में रहने से बचना चाहिए और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करते रहना चाहिए। नियमित प्रेशर की जांच भी जरूरी है ताकि मां और शिशु दोनों की स्थिति पर नजर रखा जा सके। अगर चक्कर आना अत्यधिक कमजोरी या फिर बच्चे की हलचल महसूस कम होती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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भविष्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है अध्ययन?

रिसर्च करने वाले लोगों का अनुमान है कि अगर जलवायु परिवर्तन की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो आने वाले सालों में दक्षिण एशिया में बच्चों में High Temperature से ठिगनेपन के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।ठिगनेपन (Stunting) के पीछे कारण पोषण संक्रमण स्वच्छता और मातृ स्वास्थ्य जैसे कारण होते हैं इसलिए इस अध्ययन को रिस्क की चेतावनी के रूप में देखना चाहिए।

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