रीवा नगर निगम की सड़क निर्माण व्यवस्था इन दिनों गंभीर दोहरे मापदंडों और भेदभावपूर्ण कार्यप्रणाली को लेकर शहरभर में चर्चा और तीखे सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के विभिन्न हिस्सों में सीवर लाइन बिछाने के बाद तैयार की जा रही कंक्रीट सड़कों के निर्माण में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है, जहां एक ओर आम जनता के मोहल्लों में मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लग रहे हैं, वहीं वीआईपी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

तोपखाना, बिछिया और चिरहुला कॉलोनी में बिना सरिया के बन रही हैं सड़कें
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहर के तोपखाना, बिछिया और चिरहुला कॉलोनी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सीवर लाइन डालने के बाद जब कंक्रीट सड़कों का निर्माण किया गया, तो उनमें लोहे की सरिया का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया गया। इन इलाकों के स्थानीय नागरिकों और पार्षदों ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि बिना सरिया के बनाई जा रही ये सड़कें कितनी टिकाऊ होंगी और क्या इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी? उनका कहना है कि जनता के टैक्स के पैसों से बनने वाले इन बुनियादी विकास कार्यों में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने योग्य नहीं है।
अमहिया क्षेत्र में नगर निगम अध्यक्ष के घर के सामने बिछ रहा लोहे की सरिया का जाल
इसके विपरीत, अमहिया क्षेत्र में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है, जहां नगर निगम अध्यक्ष के घर के सामने बनाई जा रही कंक्रीट सड़क में नियमों के बिल्कुल उलट बकायदा लोहे की सरिया का मजबूत जाल बिछाकर उसके ऊपर कंक्रीट डाला जा रहा है। एक ही शहर और एक ही नगर निगम सीमा के भीतर दो अलग-अलग निर्माण तकनीकों के इस्तेमाल ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
नियमों की दोहरी कार्यशैली को लेकर उठ रहे तीखे सवाल
एक ही नगर निगम क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान अपनाए जा रहे इस भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर अब शहरवासियों और जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है। लोगों का सीधा और कड़ा सवाल यह है कि यदि सड़क को टिकाऊ, मजबूत और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए लोहे की सरिया का इस्तेमाल करना तकनीकी रूप से जरूरी है, तो शहर के अन्य आम क्षेत्रों की सड़कों में इसका उपयोग क्यों नहीं किया गया? वहीं, यदि बिना सरिया के सड़क बनाना ही तकनीकी रूप से पूरी तरह सही और पर्याप्त है, तो फिर नगर निगम अध्यक्ष के वीआईपी इलाके में सरिया का जाल बिछाकर विशेष एहतियात क्यों बरती जा रही है? इस दोहरे मापदंड ने निगम के अमले की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है, और अब देखना यह होगा कि इस मामले पर जिम्मेदार अधिकारी क्या सफाई देते हैं।




