रीवा। विंध्य क्षेत्र के प्रतिष्ठित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APSU) में शैक्षणिक सत्र की अनियमितताओं और चरमराती व्यवस्थाओं को लेकर बुधवार को जमकर हंगामा हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन की लापरवाही के कारण हज़ारों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
जनवरी की परीक्षा मई तक टली, छात्रों ने पूछा- जिम्मेदार कौन?
प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय की लेटलतीफी पर कड़े सवाल खड़े किए। ABVP नेता पवन दुबे ने आरोप लगाया कि प्रशासन शैक्षणिक कैलेंडर का पालन करने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने प्रमुख रूप से बायोटेक प्रथम वर्ष की परीक्षाओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जो परीक्षाएं जनवरी में प्रस्तावित थीं, वे मई का महीना बीतने को है लेकिन अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं। यह देरी न केवल छात्रों का समय बर्बाद कर रही है, बल्कि उनके पूरे शैक्षणिक सत्र को शून्य करने की ओर धकेल रही है।
कैंपस में सुविधाओं का अभाव: न पीने का साफ पानी, न स्वच्छता
परीक्षाओं में देरी के साथ-साथ छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर की बदहाली पर भी आक्रोश जताया। कुलपति को सौंपे गए ज्ञापन में छात्रों ने मूलभूत सुविधाओं के अभाव की सूची पेश की:
- पेयजल संकट: भीषण गर्मी के बावजूद परिसर में ठंडे और साफ पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है।
- गंदगी का अंबार: स्वच्छता के मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे छात्रों को असुविधा हो रही है।
- तालाबंदी की चेतावनी: छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि इन बुनियादी समस्याओं और परीक्षा संबंधी मुद्दों का निराकरण तत्काल नहीं हुआ, तो छात्र उग्र आंदोलन करते हुए विश्वविद्यालय में तालाबंदी करने को मजबूर होंगे।
कुलपति की सफाई: पाठ्यक्रम में बदलाव है देरी की मुख्य वजह
हंगामे और नारेबाजी के बीच कुलपति प्रो. राजेंद्र कुड़रिया ने छात्रों से मुलाकात कर वस्तुस्थिति स्पष्ट की। उन्होंने परीक्षाओं में हो रहे विलंब का कारण पाठ्यक्रम (Syllabus) में किए गए बदलाव को बताया। कुलपति ने प्रदर्शनकारी छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि:
“विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के हितों के प्रति सजग है। सभी लंबित परीक्षाएं मई के अंत तक हर हाल में संपन्न करा ली जाएंगी।”
सुधार के लिए विशेष समिति का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति ने तत्काल दो बड़े निर्णय लिए हैं। उन्होंने छात्र समस्याओं की निरंतर मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष समिति (Special Committee) गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय के अधिकारियों को एक निश्चित समय सीमा (Deadline) के भीतर परिसर की बुनियादी सुविधाओं—खासकर पेयजल और स्वच्छता—को दुरुस्त करने की कड़ी हिदायत दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन के इन आश्वासनों से छात्रों का गुस्सा शांत होता है या आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा।




