अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर अपने फैसले से पलट गए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने रूसी तेल की खरीद पर लगी पाबंदियों में एक महीने की और राहत दे दी है। यह फैसला 17 अप्रैल को सामने आया, जब US Treasury Department ने आधिकारिक तौर पर छूट बढ़ाने का ऐलान किया।यह कदम ऐसे समय आया है, जब दो दिन पहले ही अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने साफ कहा था कि अब कोई छूट नहीं दी जाएगी।
जनरल लाइसेंस’ क्या है?
अमेरिका ने जिस छूट को बढ़ाया है, उसे General License For Russian Oil कहा जाता है। इसका मतलब है कि 17 अप्रैल तक जिन टैंकरों में रूसी तेल पहले ही लोड हो चुका है, उनकी डिलीवरी पर अगले एक महीने तक कोई प्रतिबंध लागू नहीं होगा।यह छूट पहले मार्च 2025 में दी गई थी, जिसे अब आगे बढ़ा दिया गया है।
भारत को सीधा फायदा
इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है। अमेरिका द्वारा लगाए गए High Tariff Impact On India Oil Import के कारण फरवरी 2025 में भारत ने रूस से तेल खरीद कम कर दी थी। अब नई छूट मिलने के बाद भारत फिर से बिना ज्यादा दबाव के रूस से कच्चा तेल खरीद सकता है।
अमेरिका का यू-टर्न क्यों?
अमेरिका ने अपने इस फैसले पर कोई आधिकारिक कारण नहीं दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कदम उन देशों के दबाव में लिया गया है, जो रूस से तेल खरीदते हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक बाजार में Global Energy Supply Crisis और खाड़ी देशों से सप्लाई में कमी को देखते हुए यह फैसला लिया गया।
रूस को भी बड़ा फायदा
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के तेल निर्यात पर भारी प्रतिबंध लगे थे, लेकिन मौजूदा हालात में यह छूट रूस के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि Russia Oil Profit During Iran Conflict बढ़ा है, क्योंकि ईरान से जुड़े तनाव के चलते बाजार में सप्लाई अस्थिर रही है।
होर्मुज स्ट्रेट पर नया तनाव
वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए अहम Strait of Hormuz को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।ईरान ने इसे कमर्शियल जहाजों के लिए खोल दिया है, लेकिन अमेरिका की ओर से नेवल ब्लॉकेड जारी रखने की बात कही गई है।Donald Trump ने कहा है कि यह नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान के साथ “100% डील” नहीं हो जाती।इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी दबाव जारी रहा, तो स्ट्रेट पूरी तरह खुला नहीं रहेगा।
