Bhojshala Controversy: ASI सर्वे रिपोर्ट पर बहस तेज, हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को दिया तर्क रखने का पूरा अवसर

Bhojshala Controversy: धार के भोजशाला परिसर में पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर चल रहे कानूनी विवाद (Bhojshala Dispute) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने परिसर में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द (Communal Harmony) बनाए रखने के लिए स्थायी नियम या उच्च स्तरीय आयोग गठन की मांग की है।

Bhojshala Controversy: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भोजशाला (Bhojshala) मामले पर शुक्रवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता अंतर सिंह और अन्य ने अपनी याचिका के माध्यम से कोर्ट से अनुरोध किया कि भविष्य में बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन जब शुक्रवार को पड़ता है, तब दोनों समुदायों के बीच किसी भी प्रकार के टकराव की स्थिति न बने।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि भोजशाला परिसर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय दोनों अपनी-अपनी प्रार्थना पद्धति (Prayer Practices) के अनुसार उपयोग करते हैं। ऐसे में बसंत पंचमी शुक्रवार को आने पर तनावपूर्ण माहौल बन जाता है। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए उच्च स्तरीय आयोग (High-Level Committee) का गठन किया जाए या फिर स्पष्ट नियम तय किए जाएं।

कोर्ट ने याचिका को सांप्रदायिक सद्भाव से जोड़ा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह मुद्दा सांप्रदायिक सौहार्द (Communal Harmony) बनाए रखने से जुड़ा है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) के वकील से भी कहा कि वे अपनी तरफ से तर्क रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। अब अगली सुनवाई में याचिकाकर्ता अपना पक्ष और मजबूती से रखेंगे।

ASI ने किया था 98 दिनों का विस्तृत सर्वे

गौरतलब है कि पिछले साल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिनों तक विस्तृत सर्वेक्षण (Archaeological Survey) किया था। सर्वे टीम ने दो हजार से अधिक पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में जमा की है।

सर्वे रिपोर्ट में क्या सामने आया?

ASI रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भोजशाला का निर्माण 11वीं शताब्दी के आसपास हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में परिसर में तोड़फोड़ की गई। सर्वे में भित्ति चित्रों पर संस्कृत श्लोक, देवी-देवताओं की मूर्तियां तथा विभिन्न हिंदू प्रतीक चिह्न (Hindu Symbols) मिलने की बात कही गई है। मुस्लिम पक्ष ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

पांच याचिकाओं पर बारी-बारी से सुनवाई

वर्तमान में भोजशाला मामले से जुड़ी कुल पांच याचिकाएं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित हैं। कोर्ट इन सभी याचिकाओं पर बारी-बारी से सुनवाई कर रहा है और सभी पक्षकारों को अपने तर्क रखने का पर्याप्त अवसर दे रहा है। अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट जाने वाले याचिकाकर्ता को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। मामले की अगली तारीख जल्द ही तय होने की संभावना है।

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