तंबाकू दिवस। 31 मई को दुनिया भर में हर साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य तंबाकू सेवन के व्यापक प्रसार और नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करना है, जो वर्तमान में दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता है, जिनमें से 890,000 गैर-धूम्रपान करने वालों का परिणाम दूसरे नंबर पर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सदस्य राज्यों ने 1987 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस बनाया। पिछले इक्कीस वर्षों में, दुनिया भर में सरकारों, सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों, धूम्रपान करने वालों, उत्पादकों से उत्साह और प्रतिरोध दोनों मिले हैं।
भारत में चलाई गई पायलेट परियोजना
राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम वर्ष 2007-08 में भारत के 21 राज्यों के 42 जिलो में पायलेट परियोजना के रूप में प्रारम्भ किया गया। सर्वप्रथम राजस्थान के 2 जिलों जयपुर व झुंझुनू को सम्मिलित कर गतिविधियाँ प्रारम्भ की गयी। वर्ष 2015-16 में जयपुर, झुन्झुनू के अतिरिक्त अजमेर, टॉक, चूरू, उदयपुर, राजसमन्द, चित्तौडगढ, कोटा, झालावाड, भरतपुर, सवाईमाधोपुर, अलवर, जैसलमेर, पाली, सिरोही, श्रीगंगानगर जिले (कुल 17 जिले) योजनान्तर्गत सम्मिलित किये गये ।
4000 से अधिक जहरीले रसायन
तंबाकू का सेवन किसी भी रूप (धूम्रपान, चबाना, या सूंघना) में स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इसमें मौजूद निकोटीन गंभीर लत का कारण बनता है और इसमें 4000 से अधिक जहरीले रसायन होते हैं जो शरीर के हर अंग को नुकसान पहुंचाते हैं। तंबाकू के सेवन से दिल की बीमारी, स्ट्रोक, फेफड़ों की गंभीर बीमारी और उच्च रक्तचाप का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके कारण मुंह, गले, फेफड़ों, ग्रासनली (फूड पाइप) और पेट का कैंसर सबसे ज्यादा होता है। तंबाकू चबाने या खाने से दांत खराब हो जाते हैं, मसूड़े सिकुड़ जाते हैं और मुंह में छाले (जो बाद में कैंसर का रूप ले सकते हैं) हो जाते हैं। शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। तंबाकू छोड़ने के महज 20 मिनट बाद ही हृदय गति सामान्य होने लगती है। कुछ ही महीनों में फेफड़ों की कार्यक्षमता सुधर जाती है और सांस लेने में आसानी होने लगती है।
1987 से मनाया जा रहा तंबाकू दिवस
विश्व तंबाकू निषेध दिवस की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 1987 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों और मौतों के प्रति दुनिया भर के लोगों को जागरूक करना था। विश्व स्वास्थ्य सभा ने 1987 में प्रस्ताव पारित करके 7 अप्रैल 1988 को पहला विश्व धूम्रपान निषेध दिवस घोषित किया था। इसके बाद 1988 में एक नया प्रस्ताव पारित किया गया और हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। यह दिवस लोगों को तंबाकू उत्पादों को छोड़ने, इसके दुष्प्रभावों (जैसे कैंसर) को समझने और तंबाकू कंपनियों के प्रचार से बचने के लिए प्रेरित करता है।




