Kids Mobile Habbit : बच्चा बिना मोबाइल देखे नहीं खाता है खाना तो ऐसे छुड़ाएं ये आदत

Kids Mobile Habit : आज के समय में बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को खाना खिलाने के दौरान या फिर परेशान होने पर तुरंत उनका हाथ मोबाइल फोन पकड़ाते हैं। उन्हें लगता है कि इससे बच्चा तुरंत शांत हो जाएगा। लेकिन यह तरीका सही नहीं है, बल्कि यह बहुत खतरनाक साबित हो रहा है। नई स्टडी में पता चला है कि कम उम्र में बच्चों को मोबाइल फोन देना उनके विकास के लिए सही नहीं है। यह उनके भविष्य के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है।

क्या कहती है अमेरिकी यूनिवर्सिटी की रिसर्च?

अमेरिका की एक मशहूर यूनिवर्सिटी और छह अन्य यूनिवर्सिटीज की टीम ने 210 परिवारों पर एक रिसर्च की। इसमें 9 महीने से लेकर 30 महीने तक के बच्चों का विकास देखा गया। इस स्टडी के नतीजे बहुत चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट कहती है कि जो बच्चे बार-बार मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं, उनके व्यवहार में तरह-तरह की समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। खासतौर पर उनका आत्म-नियंत्रण कमजोर हो सकता है।

बच्चों से ज्यादा से ज्यादा संवाद करें

जब बच्चे परेशान होते हैं, तो उन्हें प्यार से समझाना और बातचीत करना सही तरीका है। इससे बच्चे अपनी बात समझते हैं और शांत हो जाते हैं। लेकिन आजकल के बच्चे जब परेशान होते हैं, तो उनके सामने स्क्रीन खोल दी जाती है। एक्सपर्ट्स इसे ‘डिस्प्लेसमेंट’ कहते हैं। यानी, बातचीत और खेल-कूद की जगह स्क्रीन का इस्तेमाल कर लेना। इससे उनके सामाजिक और भावनात्मक विकास में रुकावट आती है और उन्हें मनोवैज्ञानिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

रील्स देखने की आदत से बच्चे क्यों हो रहें चिड़चिड़े?

आज के बच्चे अक्सर मोबाइल पर रील्स और छोटी-छोटी वीडियो देखते हैं। कई बार वे फास्ट-फॉरवर्ड करके वीडियो देख लेते हैं, जिससे उनका धैर्य कमजोर हो रहा है। थेरेपिस्ट्स का कहना है कि इस आदत के कारण बच्चों का धैर्य खत्म हो रहा है। वे बात-बात पर चिड़चिड़े हो जाते हैं, पढ़ाई-लिखाई में रुचि कम हो जाती है और जब उन्हें किसी बात को पूरा सुनना पड़ता है, तो वे बोर हो जाते हैं। यह सब उनके मानसिक विकास के लिए सही नहीं है।

बच्चों को 1.2 घंटे से ज्यादा मोबाइल न दें

एक और बड़े अध्ययन के अनुसार, 2,857 बच्चों पर हुई 10 स्टडीज में पता चला है कि 0 से 5 साल के बच्चे रोजाना करीब 2.22 घंटे मोबाइल और टीवी के सामने बिताते हैं। जबकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के लिए सुरक्षित सीमा सिर्फ 1.2 घंटे है। यानी, बच्चे अपनी उम्र की सीमा से दोगुना से भी ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच रहा है।

मोबाइल की स्क्रीन से बच्चों की मानसिक विकास रुक रहा

मोबाइल या टीवी की स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। उनका बोलना और भाषा सीखने की क्षमता धीमी हो रही है। साथ ही, उनका सोचने-समझने का कौशल कम हो रहा है। बच्चे समाज से मिलना-जुलना नहीं सीख पा रहे हैं और मोटापा और नींद की गड़बड़ी जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।

पैरेंट्स करें ये काम

बच्चों के बेहतर भविष्य और सही विकास के लिए जरूरी है कि हम उनका स्क्रीन टाइम नियंत्रित करें। उन्हें खेल-कूद, बातचीत और बाहर खेलने का मौका दें। बच्चों को टीवी और मोबाइल से दूर रखकर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। तभी वे स्वस्थ और खुशहाल रह सकेंगे।

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