Bitcoin Crash: क्रिप्टो करेंसी बाजार में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. जी हां पिछले साल के $1,26,000 के अपने सबसे ऊंचे स्तर से लगभग आधी कीमत खोने के बाद, दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन, अब $60,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे फिसल गई है. गौरतलब है कि, लगभग दो सालों में ये पहली बार है जब बिटकॉइन इस निचले स्तर पर पहुंचा है. आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद मार्केट में जो तेजी आई थी, वह अब फीकी पड़ती दिख रही है. इस बड़े क्रैश ने निवेशकों के सामने ये बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि वे अब क्या करें.
बिटकॉइन में भारी बिकवाली का क्या है कारण?
विशेषज्ञों का मानना है कि बिटकॉइन में ये गिरावट कैश की कमी और बड़े निवेशकों द्वारा अपना पैसा बदलने के वजह से है. WazirX के फाउंडर निश्चल शेट्टी के अनुसार बड़े संस्थागत निवेशक अब क्रिप्टो से अपना प्रॉफिट निकालकर AI, डिफेंस, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में पैसा लगा रहे हैं. इसके अलावा, सोने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की नीतियों ने भी क्रिप्टो मार्केट पर दबाव बनाया है.
निवेशकों को अब किन बातों पर रखनी होगी नजर?
आपको बता दें कि, आने वाले कुछ दिन क्रिप्टो मार्केट के लिए बेहद अहम होने वाले हैं. निवेशकों को ये देखना होगा कि क्या बिटकॉइन $60,000-$62,000 के स्तर पर खुद को संभाल पाता है या नहीं. अगर कीमत यहां टिकती है, तो बाजार में भरोसा वापस आ सकता है. CoinDCX के को-फाउंडर सुमित गुप्ता के अनुसार क्रिप्टो का अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकारें इसे लेकर कितने नियम साफ करती हैं और बड़ी कंपनियां इसमें कितना निवेश करती हैं.
इंवेस्टर्स क्या करे करें?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसी गिरावट हर मार्केट का हिस्सा होती है. साथ ही डरकर अपनी होल्डिंग बेचने के बजाय, निवेशकों को समझदारी से काम लेना चाहिए. Mudrex और दूसरे जानकारों के मुताबिक, SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना सबसे सही रहेगा जिससे कीमत एवरेज हो सके. नए निवेशकों को अपने कुल पोर्टफोलियो का सिर्फ 2% से 5% हिस्सा ही क्रिप्टो में लगाना चाहिए और बिटकॉइन को ही अपनी मुख्य पसंद रखना चाहिए.




