सिंगरौली: IHSDP आवास योजना में 50 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप, मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जाँच की माँग

Allegation of ₹50 crore corruption in the IHSDP housing scheme in Singrauli.

सिंगरौली। सिंगरौली नगर निगम क्षेत्र में संचालित आईएचएसडीपी (IHSDP) आवास योजना में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आने की आशंका जताई जा रही है। योजना में हुए लगभग 50 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जाँच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की पुरज़ोर माँग की है।

निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जाँच की माँग

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के जिला अध्यक्ष सैयद अदनान हसन के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने कहा कि आईएचएसडीपी आवास योजना में बड़े पैमाने पर धांधली और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। ज्ञापन के माध्यम से माँग की गई है कि मामले की बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और इस फर्जीवाड़े में शामिल चेहरों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।

अभिलेखों, बिलों और आवंटन प्रक्रिया की हो गहन जाँच

सौंपे गए ज्ञापन में माँग की गई है कि योजना से जुड़ी सभी प्रकार की प्रशासनिक स्वीकृतियों, अब तक हुए भुगतानों, ठेकेदारों के बिलों और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की बारीकी से पड़ताल की जाए। इसके साथ ही, योजना के तहत हितग्राहियों के चयन की प्रक्रिया और राशि वितरण से जुड़े सभी सरकारी अभिलेखों की गहन जाँच की जाए। कमेटी का आरोप है कि कागज़ों और धरातल के काम में भारी अंतर है, जिसकी जाँच होना अत्यंत आवश्यक है।

रिकवरी और पात्र हितग्राहियों को हक दिलाने की अपील

कमेटी ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि यदि जाँच में कोई भी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही गबन की गई सरकारी राशि की उनसे रिकवरी (वसूली) की जानी चाहिए। इसके अलावा, जिन पात्र और गरीब हितग्राहियों को योजना का लाभ नहीं मिल सका या जिनका नुकसान हुआ है, उनके नुकसान की भरपाई कर उन्हें उनका वास्तविक अधिकार दिलाया जाए।

कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में सचेत किया है कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया और मामले की समयबद्ध व पारदर्शी जाँच शुरू नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में बड़ा जन-आंदोलन किया जाएगा।

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