शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां विकास कार्यों में लेती-लतीफी और प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शहडोल जिले के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भमरहा प्रथम में मंगलवार शाम को उस समय भारी तनाव और हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई, जब स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने क्षेत्र के दौरे पर निकले सीधी संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के काफिले को बीच रास्ते में ही रोक दिया। अपनी मांगों को लेकर अड़े ग्रामीणों ने सांसद की गाड़ी के सामने खड़े होकर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके चलते सांसद का काफिला करीब एक घंटे तक मौके पर ही फंसा रहा। इस अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शन के दौरान ब्यौहारी विधायक शरद जुगलाल कोल और तहसीलदार सुमित गुर्जर भी मौके पर मौजूद रहे, जिन्हें ग्रामीणों के तीखे आक्रोश का सामना करना पड़ा।
दरअसल, सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोना टोला में आयोजित एक ‘जन चौपाल’ कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे, जहां उनका ग्रामीणों के बीच रात्रि विश्राम का भी कार्यक्रम तय था। जैसे ही उनका काफिला भमरहा प्रथम गांव के पास पहुंचा, पहले से ही आक्रोशित ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और अपनी लंबित समस्याओं को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों ने सांसद और विधायक को खरी-खोटी सुनाते हुए आरोप लगाया कि क्षेत्र की झापर नदी पर बना पुल पिछले लगभग तीन साल से बनकर पूरी तरह तैयार खड़ा है, लेकिन इसके बावजूद इसे आज तक आम जनता के आवागमन के लिए नहीं खोला गया है। प्रशासन की इस लापरवाही के कारण हजारों ग्रामीणों को हर दिन लंबा चक्कर लगाने या जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का न मिलना है। ग्रामीणों और जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र सिंह पटेल ने मौके पर बताया कि झापर नदी पर पुल निर्माण के साथ-साथ दोनों तरफ पहुंच मार्ग बनाने के लिए क्षेत्र के करीब 30 गरीब किसानों की कीमती जमीन अधिग्रहित की गई थी। पुल तो बनकर खड़ा हो गया, लेकिन भूमि अधिग्रहण के बदले प्रभावित किसानों को आज तक मुआवजे की फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई है। अधिकारियों और संबंधित विभागों के चक्कर काट-काट कर थक चुके किसानों का कहना है कि उन्हें हर बार केवल कोरा आश्वासन ही दिया गया। मुआवजे की राशि न मिलने के कारण ही एप्रोच रोड का काम अटका हुआ है और इसी वजह से करोड़ों की लागत से बना यह पुल सफेद हाथी साबित हो रहा है।
घंटे भर चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और ग्रामीणों के भारी दबाव के बाद सांसद डॉ. राजेश मिश्रा को गाड़ी से उतरकर प्रदर्शनकारियों के बीच आना पड़ा। उन्होंने मौके पर ही मौजूद तहसीलदार और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात की और किसानों की सूची मंगाकर मुआवजे की प्रक्रिया में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए। सांसद ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को भरोसा दिलाया कि उनके हक का मुआवजा जल्द से जल्द दिलाया जाएगा और एप्रोच रोड का काम पूरा करवाकर पुल को अविलंब चालू कराया जाएगा। सांसद और स्थानीय विधायक से ठोस और लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने रास्ता खाली किया, जिसके बाद काफिला आगे कोना टोला के लिए रवाना हो सका। बुधवार को इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।




