नेपाल। तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से नेपाल में आई त्रासदी से दुनिया भर के लोग हैरान है, तो वही अब मदद के लिए दूसरे देश आगे आ रहे है। इसी बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बाढ़ राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए भारत समेत पड़ोसी देशों को संसद में धन्यवाद किए है। बुधवार को संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और चीन ने सही समय पर राहत सामग्री, तकनीकी टीमें और आपात मदद भेजी।
ऐसी मदद
जानकारी के तहत भारत ने राहत सामग्री के साथ ही टीमें सुरंगों में सर्च ऑपरेशन और शवों की पहचान में मदद कर रही हैं। वहीं, चीन ने ग्यिरोंग बॉर्डर तक जाने वाला हाईवे खोल दिया है, जिससे राहत दल प्रभावित इलाकों तक पहुंच रहे हैं।
बाढ़ में 1127 पहुंचा मृतकों का आंकड़ा
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 1127 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4800 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। बचाव और खोज अभियान जारी है। राहतकर्मी और सुरक्षा बल बाढ़ प्रभावित इलाकों तथा नदी के निचले हिस्सों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
3 प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर
नेपाल में बाढ़ और लगातार बारिश के बाद सुन कोशी, बूढ़ी गंडकी और महाकाली नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया है। प्रशासन ने मध्य, पश्चिमी और पूर्वी नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है, और तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है।




