सुप्रीम कोर्ट ने SIR को बताया वैध और संवैधानिक

Supreme Court Verdict On SIR: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने वाले विपक्षी दलों को चुप करा दिया है. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार समेत पांच राज्यों में हुए चुनाव के दौरान किए गए SIR को वैध और संवैधानिक करार दिया है. CJI सूर्यकांत (CJI Suryakant) की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है और यह मनमाना नहीं है।

बता दें की चुनाव आयोग ने SIR की शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव से की थी जिसके बाद यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल, केरलम, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में की गई जबकि असम में स्पेशल रिवीजन यानी SR हुआ था. इन राज्यों में करीब 2.6 करोड़ वोटर्स के नाम काटे गए थे.

लोगों के वोटर्स लिस्ट से नाम काटने के खिलाफ विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ रुख किया था और इस प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए चुनाव आयोग पर बीजेपी के लिए काम करने का आरोप लगाया था. राहुल गाँधी ने इलेक्शन कमीशन को लेकर तो यह तक कह दिया था कि ECI और BJP मिलकर वोट चोरी करते हैं।

सोशल मीडिया में अब लोग राहुल गाँधी (Rahul Gandhi SIR) के वीडियो शेयर कर पूछ रहे हैं कि क्या अब राहुल गाँधी सुप्रीम कोर्ट पर भी ऐसे आरोप लगाना शुरू कर देंगे?

कांग्रेस प्रवक्ता प्रदीप भंडारी (Pradeep Bhandari) ने कहा कि राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी एक्सपोस हो गई है. यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने शुरू से अंत तक विरोध किया क्योंकि वे भारतीय मतदाताओं के साथ नहीं बल्कि अवैध घुसपैठियों के साथ खड़े थे। यह सही मायने में एक “राष्ट्रविरोधी कृत्य” था! क्या राहुल गांधी आज भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए माफी मांगेंगे?

भले ही सुप्रीम कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को पूरी तरह वैध और संवैधानिक मान लिया है इसके बावजूद विपक्षी दल के कई नेता सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नज़र नहीं आ रहे हैं। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने इसे न्यायतंत्र के इतिहास का काला दिन बताया है.

बहरहाल कोर्ट ने चुनाव आयोग को संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए व्यक्तियों के नाम चार हफ्ते में केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश भी दिया है। जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनके मामले चुनाव आयोग को 4 हफ्ते के भीतर नागरिकता तय करने वाली संबंधित सरकारी एजेंसी को भेजने होंगे और उस एजेंसी को संबंधित लोगों को नोटिस देना होगा। उन्हें अपनी बात रखने का मौका देना होगा और चुनाव से पहले फैसला करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बीजेपी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से अब जनता को ECI के खिलाफ बरगलाने पर माफ़ी की मांग कर रही है.

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