नई दिल्ली। RSS प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों संगठन के ग्लोबल आउटरीच कार्यक्रम के तहत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर हैं। 29 अगस्त को उन्होंने न्यूयॉर्क के Madison Square Garden में आयोजित ‘Universal Oneness Celebration’ में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित किया। कार्यक्रम में 39 अमेरिकी राज्यों से 5,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue (AHEAD) ने रक्षाबंधन के मौके पर किया था।
भागवत बोले- सच्चा हिंदुत्व सभी को साथ लेकर चलता है
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में समावेशी सोच, वैश्विक भाईचारे और समाज के प्रति जिम्मेदारी की बात की। उन्होंने हिंदू और मुस्लिमों के संदर्भ में कहा कि अगर कोई व्यक्ति खुद को हिंदू कहता है, लेकिन मानता है कि भारत में मुसलमानों के लिए जगह नहीं होनी चाहिए, तो वह वास्तव में हिंदू नहीं है। उन्होंने कहा कि सच्चा हिंदुत्व सभी को साथ लेकर चलने में है। उन्होंने भारत की ‘विविधता में एकता’ को देश की पहचान बताया।
प्रवासी भारतीयों से बोले- जिस देश में रहें, उसके प्रति वफादार रहें
भागवत ने अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से कहा कि वे अपनी जन्मभूमि भारत से जुड़े रहें, लेकिन जिस देश में रहकर काम कर रहे हैं, उसके प्रति पूरी वफादारी रखें। उन्होंने वहां के समाज के विकास और भलाई में योगदान देने की भी अपील की।उन्होंने धर्म को केवल पूजा की पद्धति नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन बनाने वाली व्यवस्था बताया। भागवत ने कहा कि केवल भौतिक सुख के पीछे भागने से शांति और संतुष्टि नहीं मिल सकती।
टोरंटो में बोले- हिंदू जागेगा तो दुनिया जागेगी
न्यूयॉर्क के बाद मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में ‘Hindu Vishwa Bandhu – Embrace the World in Friendship’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने 2,500 से ज्यादा लोगों को संबोधित किया। कार्यक्रम में कनाडा के 8 प्रांतों से लोग पहुंचे थे। भागवत ने कहा कि “हिंदू जागेगा तो दुनिया जागेगी।” उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के जागरूक और संगठित होने का मतलब किसी पर अपना प्रभुत्व जमाना नहीं है। इसका उद्देश्य समाज की सेवा और सभी के कल्याण के लिए काम करना है।
‘भारत के DNA में सेवा’
भागवत ने कहा कि भारत के DNA में सेवा की भावना है। दुनिया में जब भी कहीं संकट आया, भारत ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उन्होंने कहा कि दूसरों की मदद करना भारत की सदियों पुरानी परंपरा है। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी महाशक्ति नहीं बनना है जो दूसरों पर हुक्म चलाए। भारत को विश्वगुरु बनकर ज्ञान, सेवा और त्याग के जरिए दुनिया का मार्गदर्शन करना है। उनके मुताबिक भारत की ताकत दूसरों पर कब्जा करने में नहीं, बल्कि ज्ञान बांटने और सेवा करने में रही है।
‘भारत ने किसी का धर्मांतरण नहीं कराया, किसी देश पर कब्जा नहीं किया’
भागवत ने भारत की सहिष्णुता और शरण देने की परंपरा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने अलग-अलग समय में परेशान और संकट में फंसे लोगों को शरण दी। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा किसी देश पर कब्जा करने या लोगों का धर्मांतरण कराने की नहीं रही। उन्होंने भारत की इसी सोच को दुनिया के लिए एक उदाहरण बताया।
विविधता ही एकता की पहचान
टोरंटो में भागवत ने कहा कि भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषा, रंग, रूप और जीवनशैली के बावजूद लोगों में एकता की भावना बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि विविधता प्रकृति का हिस्सा है और एकता हमारी वास्तविक पहचान है। अलग-अलग रूप और विचार भारत को कमजोर नहीं करते, बल्कि उसकी एकता को और सुंदर बनाते हैं।




