रीवा : टीआरएस कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग में “बौद्धिक संपदा अधिकार” पर संगोष्ठी आयोजित

शासकीय ठाकुर रणमत सिंह स्वशासी महाविद्यालय, रीवा के समाजशास्त्र विभाग में सोमवार को “बौद्धिक संपदा अधिकार” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं विषय की प्रस्तावना के साथ हुआ। संयोजक एवं समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अखिलेश शुक्ल ने संगोष्ठी के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बौद्धिक संपदा अधिकार शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने समाजशास्त्रीय अनुसंधान में मौलिकता बनाए रखने, साहित्यिक चोरी रोकने और शोधकर्ता को उसके बौद्धिक श्रम का उचित श्रेय दिलाने में इसकी अहम भूमिका पर जोर दिया।

मुख्य वक्ता के रूप में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, बुढार के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय ने शिरकत की। अपने सारगर्भित उद्बोधन में उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कॉपीराइट, पेटेंट, ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिज़ाइन जैसे प्रमुख प्रकारों की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने भारत की राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति 2016 “क्रिएटिव इंडिया; इनोवेटिव इंडिया” का उल्लेख करते हुए बताया कि एक सुदृढ़ बौद्धिक संपदा तंत्र नवाचार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।

संगोष्ठी में महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. शाहेदा सिद्दीकी, डॉ. फरजाना बानो, प्रोफेसर शालिनी पाण्डेय, प्रोफेसर दीपक पटेल समेत कई शिक्षकों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रोफेसर शालिनी पाण्डेय ने किया, जबकि अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. आभा द्विवेदी द्वारा किया गया।

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