Raghav Chaddha Political Career : ‘मैं सही आदमी था, गलत पार्टी में फंस गया’, इस्तीफे के बाद बोले राघव चड्ढा, जानिए राजनीतिक सफर 

Raghav Chadha joining Bharatiya Janata Party with six other AAP Rajya Sabha MPs in Delhi.

Raghac Chaddha Political Career : राजनीति के गलियारों में आज ऐसा झटका लगा है कि सबकी बोलती बंद हो गई है। अरविंद केजरीवाल की ‘झाड़ू’ वाली छवि पर चोट लगी है। जी हां, कभी उनके सबसे भरोसेमंद और ‘ब्लू आइड बॉय’ कहे जाने वाले राघव चड्ढा ने ‘आप’ को छोड़कर बीजेपी का भगवा चोला ओढ़ लिया है।

लेकिन रुकिए! यह सिर्फ एक सांसद का इस्तीफा नहीं है, यह पूरी ‘पॉलिटिकल डकैती’ है। राघव ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ मिलकर दावा किया है कि अब आम आदमी पार्टी के दो तिहाई सदस्य राज्यसभा में बीजेपी के साथ मिल रहे हैं। यानी, उन्होंने जाते-जाते केजरीवाल के घर में ‘ऑपरेशन लोटस’ चला दिया है, जो केजरीवाल को डराता था।

मैं सही आदमी था, गलत पार्टी में फंस गया – राघव चड्ढा 

कल तक जो केजरीवाल लंदन रिटर्न्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपनी वित्तीय स्थिति पर बात करते थे, आज उन्होंने अपनी ही पार्टी का ‘पॉलिटिकल ऑडिट’ कर दिया। राघव कह रहे हैं, ‘मैं सही आदमी था, लेकिन गलत पार्टी में फंस गया था।’ ये बात तब क्यों नहीं समझ आई जब वे अन्ना आंदोलन में केजरीवाल का साथ दे रहे थे? या पंजाब की जीत के बाद जब आप ‘चाणक्य’ कहलाते थे? ये नैतिकता का पाठ तब क्यों याद आया जब राज्यसभा में ‘डिप्टी लीडर’ की कुर्सी अशोक मित्तल को दे दी गई?

यह विश्वासघात है- राघव चड्ढा 

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब कुर्सी खिसकी। आज पूरी पार्टी भगवा रंग में रंग गई है। आम आदमी पार्टी की तरफ से कहा जा रहा है, ‘यह विश्वासघात है’। पार्टी उन्हें गद्दार कह रही है, लेकिन राघव के पास हलफनामे के मुताबिक सिर्फ 36 लाख की संपत्ति और पुरानी स्विफ्ट कार है। अब वे बीजेपी का साथ देने के लिए तैयार हैं। उनका दिमाग बड़ा है, इसलिए उन्हें घाटे का सौदा बिल्कुल पसंद नहीं था।

राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर 

राघव चड्ढा का सफ़र किसी फिल्म की तरह रहा। दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की। फिर आम आदमी पार्टी ज्वाइन की और विधायक बने। इसके बाद अभिनेत्री परिनीत चोपड़ा से शादी भी की। अब उनकी पूरी सियासी पारी बीजेपी की बैटिंग पर दिखेगी।

राजनीति में आने से पहले कंपनी में जॉब करते थे राघव 

राघव का जन्म 11 नवंबर 1988 को नई दिल्ली में हुआ। उन्होंने मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से सीए की डिग्री ली। राजनीति में आने से पहले वे डेलॉइट और ग्रांट थॉर्नटन जैसी बड़ी कंपनियों में काम कर चुके थे, जिससे उनका प्रोफेशनल बैकग्राउंड मजबूत माना जाता है।

 अन्ना आंदोलन से AAP में शामिल हुए थे राघव 

साल 2012 में जब अन्ना आंदोलन हुआ, तब राघव चड्ढा पार्टी का हिस्सा बने। उन्होंने दिल्ली लोकपाल बिल के ड्राफ्ट में बड़ा रोल किया। जल्दी ही वे पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय प्रवक्ता बन गए। 2015 में जब आम आदमी पार्टी ने खूब सफलता पाई, तो सिर्फ 26 साल की उम्र में उन्हें राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने मनीष सिसोदिया के साथ मिलकर पार्टी का वित्तीय काम संभाला। 

2019 में लोकसभा का चुनाव लड़ा 

2019 में उन्होंने दक्षिण दिल्ली से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। फिर 2020 में उन्होंने दिल्ली की राजेंद्र नगर सीट से जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड में उपाध्यक्ष का पद संभाला। 2022 में उन्हें पंजाब के जरिए राज्यसभा में जगह मिली और वे देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल हो गए। 

2 अप्रैल को AAP ने राघव को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाया 

फिर साल 2024 में आम आदमी पार्टी के पीछे ईडी पड़ गई और उसके बाद से राघव चड्ढा और पार्टी के रिश्तों में खटास आने लगी। 2 अप्रैल 2026 को उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया गया। फिर 24 अप्रैल 2026 को उन्होंने ‘आप’ छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। बस इसी के साथ सियासी हलचल तेज हो गई।

अब सवाल यह है कि केजरीवाल अपने इस ‘बागी’ राघव को कैसे बर्दाश्त करेंगे? क्या राघव बीजेपी के नए ‘सुपरस्टार’ बनेंगे या बस एक ‘दल-बदलू’ के तौर पर याद किए जाएंगे? 

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