रीवा। जनपद पंचायत रीवा में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुँच गई है। वर्तमान जनपद अध्यक्ष के खिलाफ सदस्यों ने खुला मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्र के विकास और प्रशासनिक कामकाज से असंतुष्ट कुल 18 जनपद सदस्यों ने एकजुट होकर अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का मन बना लिया है। इस कदम के बाद से ही स्थानीय राजनीति में भूचाल आ गया है और पक्ष-विपक्ष के बीच खींचतान तेज हो गई है।
प्रशासन पर तारीख न देने का आरोप, मची खलबली
अविश्वास प्रस्ताव पर अड़े जनपद सदस्यों का गंभीर आरोप है कि वे अपनी मांग को लेकर कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कलेक्टर और विधिक अधिकारी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के लिए कोई तारीख तय नहीं की जा रही है। सदस्यों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जानबूझकर मामले को टाला जा रहा है। इस खींचतान की वजह से स्थानीय प्रशासनिक महकमे में भी भारी खलबली मची हुई है और अधिकारी इस पर कुछ भी स्पष्ट कहने से बच रहे हैं।
“अध्यक्ष पति” चला रहे सरकार, वित्तीय अनियमितता के आरोप
मोर्चा खोलने वाले सदस्यों ने अध्यक्ष पर निष्क्रियता और उनके परिवार के हस्तक्षेप का बड़ा आरोप लगाया है। सदस्यों का कहना है कि जनपद अध्यक्ष का सारा कामकाज उनके पति द्वारा संभाला जा रहा है, जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी है। इसके अलावा, समय पर न तो सामान्य सभा की बैठकें बुलाई जा रही हैं और ना ही कोई महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकें हो रही हैं, जिससे विकास कार्य ठप पड़े हैं। सदस्यों ने राज्य वित्त की राशि के आवंटन और खर्च में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता होने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
उच्चाधिकारियों की शरण और उग्र आंदोलन की चेतावनी
जनपद सदस्यों ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि उनके धैर्य की परीक्षा न ली जाए। उन्होंने साफ किया है कि यदि स्थानीय प्रशासन ने जल्द ही अविश्वास प्रस्ताव के लिए मतदान की तिथि घोषित नहीं की, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। सदस्य इस मामले को लेकर भोपाल में उच्चाधिकारियों की शरण लेंगे और आने वाले दिनों में कलेक्ट्रेट का घेराव कर उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




