Global Oil price Market में सोमवार को तेज उछाल देखने को मिला है। क्रूड ऑयल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है जबकि wti क्रूड करीब $100 के आसपास ट्रेड करता है। यह तेजी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नए प्रस्ताव को खारिज करने और स्टेट ऑफ हारमोंज के बंद रहने की खबरों के बाद देखने को मिली है। बढ़ती ऑयल प्राइस का असर भारत समेत तेल आयात करने वाले देशों के इकोनॉमी पर भी देखने को मिल सकता है।

Strait of Hormuz के संकट से बढ़ी सप्लाई की चिंता
मिडिल ईस्ट देश का Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल के रास्तों में से एक हैं। वैश्विक तेल सप्लाई का सबसे बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से जाता है मौजूदा तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिससे इंटरनेशनल मार्केट में सप्लाई बाधित होने की आशंका बताई जा रहीहै। यदि यह स्थिति लंबी चली तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में और भी अस्थिरता का माहौल देखने को मिल सकता है। स्टॉक एक्सचेंज अरे कमोडिटी मार्केट के अनुसार सोमवार को कारोबार में क्रूड में लगभग तीन प्रतिशत की तेजी देखी गई।
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Donald Trump के बयान से बढ़ा बाजार का दबाव
जानकारी के अनुसार ईरान में हाल ही में किसफायर और प्रतिबंधों में रहता से जुड़ा प्रस्ताव दिया है। हालांकि अमेरिका प्रशासन ने इसको पर्याप्त नहीं माना है डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सख्त रुख दिखाया है जिसके बाद निवेश करने वाले लोगों की चिंता बढ़गई है। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार फिलहाल जियो पोलिटिकल रिस्क प्रीमियम की कीमत में शामिल हो रहा है। यही कारण है कि Oil Prices मैं अचानक से तेजी देखने को मिल रही है इसके साथ-साथ सोना और अन्य महंगी धातु की खरीदारी भी बढ़ी है।
इसका भारत पर क्या होगा असर
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात के माध्यम से ही हासिल करता है। ऐसे में इंटरनेशनल मार्केट में Oil Prices बढ़ाने का सीधा असर घरेलू इकोनॉमी पर देखा जा सकता है पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ने के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक लागत में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती है तो खुदरा महंगाई दर पर भी असर होगा। इसके अलावा रुपए पर दबाव और चालू खाते के घाटे की वृद्धि की संभावना भी देखी जा सकती है।
शेयर बाजार और निवेशकों की चिंता क्या है
सोमवार के बिजनेस सत्र में एशियाई बाजार में कमजोरी देखने को मिली है भारतीय शेयर बाजार में भी ऊर्जा लागत बढ़ने की उम्मीद होने के कारण दबाव बना हुआ है।Market analysts के मुताबिक, aviation, paint, chemical और logistics sectors पर इसका अधिक असर पड़ सकता है क्योंकि इन बिजनस की लागत सीधे क्रूड ऑयल से जुड़ी है। हालांकि तेल कंपनियों को सीमित लाभ मिलने की संभावना बताई जा रही है निवेशकों को फिलहाल जिओ पॉलीटिकल डेवलपमेंट और अमेरिका ईरान वार्ता पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
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Oil Prices का आगे क्या रह सकता है आउटलुक
बाजार विश्लेषकों के अनुसार अगर मध्य एशिया तनाव और ज्यादा बढ़ जाता है तो तेल के दाम में और भी तेजी होने वाली है। फिलहाल बाजार बुरी तरह से वैश्विक घटनाक्रम पर ही निर्भर है।



