MP Fast-Track Court: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) ने सार्वजनिक परीक्षाओं (Public Exam) में पेपर लीक, नकल और अन्य गड़बड़ियों पर सख्ती बढ़ाते हुए भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चार स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Special Fast-Track Court) गठित किए हैं। इन अदालतों में पेपर लीक (Paper Leak), नकल (Unfair Means), प्रतिरूपण (Impersonation) और परीक्षा धोखाधड़ी (Exam Fraud) से जुड़े मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होगी। हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद ऐसे मामलों का निपटारा यथासंभव तीन महीने के भीतर किया जाए, ताकि सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता (Transparency) और विश्वसनीयता (Credibility) बनी रहे।
MP Fast-Track Court: सार्वजनिक परीक्षाओं (Public Exam) में पेपर लीक, नकल और अन्य गड़बड़ियों पर सख्ती बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) ने राज्य में चार स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Special Fast-Track Court) गठित किए हैं। ये अदालतें सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों की त्वरित सुनवाई करेंगी। इन कोर्ट की स्थापना भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में की गई है।
चार शहरों में नियुक्त किए गए विशेष न्यायाधीश
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया (Acting Chief Justice) के आदेश के बाद इन विशेष अदालतों के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति भी कर दी गई है। भोपाल में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण पटेल, ग्वालियर में विशाल अखंड, जबलपुर में आनंद कुमार सेहलम और इंदौर में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. (श्रीमती) शुभ्रा सिंह को स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
किन मामलों की होगी सुनवाई?
इन अदालतों में पेपर लीक (Paper Leak), परीक्षा में अनुचित साधनों (Unfair Means) का इस्तेमाल, प्रतिरूपण यानी किसी दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देना (Impersonation) और सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अन्य अपराधों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita) के संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज मामलों और राज्य या केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए अन्य मामलों की भी सुनवाई इन्हीं अदालतों में होगी।
तीन महीने में फैसला देने का लक्ष्य
हाई कोर्ट ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर निर्णय सुनाने का हरसंभव प्रयास किया जाए। इसका उद्देश्य लंबित मामलों का जल्द निपटारा कर न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
पूरे प्रदेश को मिलेगा लाभ
प्रत्येक स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) उसके मुख्यालय वाले जिले और उससे जुड़े निर्धारित क्षेत्रों तक रहेगा। इन चार अदालतों के माध्यम से पूरे मध्य प्रदेश में परीक्षा संबंधी अपराधों की प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।
पारदर्शी भर्ती और परीक्षाओं को मिलेगा बढ़ावा
नई व्यवस्था से परीक्षा धोखाधड़ी (Exam Fraud) और संगठित पेपर लीक जैसे मामलों पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही, सार्वजनिक परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं (Recruitment Process) की निष्पक्षता, पारदर्शिता (Transparency) और विश्वसनीयता (Credibility) को मजबूत करने के साथ अभ्यर्थियों का भरोसा भी बढ़ेगा।




