नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को रूस का एक बार फिर समर्थन मिला है। न्यूयॉर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।
जर्मनी-जापान को स्थायी सीट देने का विरोध
लावरोव ने UNSC में पश्चिमी देशों की स्थायी सदस्यता बढ़ाने का विरोध किया। उन्होंने खास तौर पर जर्मनी और जापान का नाम लेते हुए कहा कि इन देशों में सैन्यवाद और पुरानी दुश्मनी की प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं। रूस का कहना है कि UNSC सुधार में ग्लोबल साउथ को ज्यादा जगह मिलनी चाहिए।
भारत को कई देशों का समर्थन
भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को हाल के दिनों में कई देशों का समर्थन मिला है। पुर्तगाल और मॉरीशस ने भी भारत की दावेदारी का समर्थन किया है। इसके अलावा सितंबर में भारत और V4 देशों—हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य—की बैठक के दौरान इन चारों देशों ने भी भारत की स्थायी सीट की मांग का समर्थन किया था।
UNSC में अभी 5 स्थायी सदस्य
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका स्थायी सदस्य हैं और इनके पास वीटो का अधिकार है। बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं और उनका कार्यकाल दो साल का होता है।
भारत लंबे समय से UNSC में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान का G4 समूह भी सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग करता है। हालांकि परिषद की संरचना बदलने के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति की जरूरत है और इस मुद्दे पर अभी सदस्य देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
स्थायी सदस्यता मिलने पर भारत को भी वीटो समेत स्थायी सदस्यों के अधिकार मिलने का सवाल उठेगा। मौजूदा व्यवस्था में किसी स्थायी सदस्य की नकारात्मक वोटिंग से प्रस्ताव रुक सकता है।



