MP Land Records: मध्यप्रदेश में 15 करोड़ भू-अभिलेख होंगे डिजिटल, जुलाई से शुरू होगा अगला चरण

MP Land Records: मध्यप्रदेश सरकार भूमि अभिलेख व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत प्रदेश के करीब 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा। पहले चरण में जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग में स्कैनिंग का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि परियोजना का अगला चरण जुलाई 2026 से भोपाल और सागर संभाग के जिलों में शुरू किया जाएगा।

MP Land Records: मध्यप्रदेश में भूमि अभिलेख व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत प्रदेश के करीब 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य दशकों पुराने दस्तावेजों का संरक्षण करने के साथ-साथ नागरिकों को भूमि संबंधी रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराना है।

15 करोड़ भू-भिलेखों का होगा डिजिटाइजेशन

राजस्व विभाग प्रदेशभर में फैले पुराने भूमि रिकॉर्ड की बड़े स्तर पर स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन कराने जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों को डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित रखा जाएगा ताकि भविष्य में रिकॉर्ड के गुम होने, क्षतिग्रस्त होने या विवाद जैसी समस्याओं को कम किया जा सके। इसके लिए आधुनिक डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (Document Management System) और डीबीईएस सॉफ्टवेयर (DBES Software) का उपयोग किया जाएगा।

2008 से शुरू हुई थी आधुनिकीकरण की योजना

भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण की शुरुआत वर्ष 2008 में राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत हुई थी। बाद में 1 अप्रैल 2016 से इसे डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के रूप में लागू किया गया। इस योजना के तहत आधुनिक रिकॉर्ड रूम तैयार करने के साथ-साथ पुराने दस्तावेजों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया।

दो चरणों में करोड़ों रिकॉर्ड पहले ही हो चुके हैं डिजिटल

परियोजना के पहले दो चरणों में बड़ी संख्या में रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। पहले चरण (2013-2020) में 3 करोड़ 18 लाख 82 हजार 222 दस्तावेज स्कैन किए गए थे, जबकि दूसरे चरण (2021-22) में 2 करोड़ 39 लाख 24 हजार 462 दस्तावेजों को डिजिटल रूप दिया गया। अब तीसरे चरण में शेष रिकॉर्ड को ऑनलाइन लाने की तैयारी की जा रही है।

जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग में पूरा हुआ पहला चरण

परियोजना के पहले चरण में जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के कुल 12 जिलों को शामिल किया गया था। यहां करीब 2.70 करोड़ दस्तावेजों की 100 प्रतिशत स्कैनिंग पूरी हो चुकी है। फिलहाल इन रिकॉर्ड की डेटा एंट्री और सत्यापन का कार्य जारी है, जिसके बाद इन्हें डिजिटल सिस्टम में शामिल किया जाएगा।

जुलाई 2026 से भोपाल और सागर संभाग में शुरू होगा अगला चरण

अब परियोजना के दूसरे चरण में भोपाल और सागर संभाग के 11 जिलों को शामिल किया गया है। जुलाई 2026 से इन जिलों में रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन का काम शुरू होगा। इसके लिए जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं और तकनीकी तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।
ऐसे होगा रिकॉर्ड का सत्यापन

डिजिटाइजेशन के दौरान प्रत्येक दस्तावेज की स्कैनिंग के साथ उसका मेटाडेटा (Metadata) भी तैयार किया जाएगा। इसके बाद भोपाल में डीबीईएस आधारित डबल-बाइंड डेटा एंट्री सिस्टम (Double Bind Data Entry System) के जरिए रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा। संबंधित क्षेत्र के पटवारी ऑनलाइन गुणवत्ता परीक्षण और सत्यापन करेंगे। पूरी प्रक्रिया के बाद रिकॉर्ड को भूलेख पोर्टल (Bhulekh Portal) पर अपलोड किया जाएगा।

नागरिकों को मिलेंगे कई बड़े फायदे

परियोजना पूरी होने के बाद लोगों को भूमि रिकॉर्ड के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। खसरा, खतौनी और अन्य राजस्व अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध होंगे, जिससे रिकॉर्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से अधिक आसान और तेज होगी। इसके साथ ही पुराने दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और भूमि संबंधी विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।

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