Bengal Assembly Elections 2026: विधानसभा भंग के बाद भी ममता बनर्जी ने नहीं बदली प्रोफाइल, अभी भी खुद को बता रही हैं मुख्यमंत्री

Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा के भंग हो जाने के बाद भी ममता बनर्जी ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल को अपडेट नहीं किया है। उन्होंने अब तक अपने फेसबुक और एक्स अकाउंट पर ‘माननीय मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल’ वाला टैग बरकरार रखा हुआ है।

Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल (West Bengal) की 17वीं विधानसभा (17th West Bengal Assembly) के भंग हो जाने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कोई बदलाव नहीं किया है। वह अभी भी अपने फेसबुक और एक्स (Twitter) प्रोफाइल पर ‘माननीय मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल’ (Hon’ble Chief Minister, West Bengal) वाला टैग बरकरार रखे हुए हैं। दूसरी तरफ भाजपा ने इधर अपना CM फेस भी चुन लिया। अब बंगाल के नए सीएम होंगे सुवेंदु अधिकारी।

मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार

राज्यपाल आरएन रवि (Governor RN Ravi) ने गुरुवार को संविधान के अनुच्छेद 174 (2)(बी) (Article 174(2)(b)) का इस्तेमाल करते हुए विधानसभा को भंग कर दिया। विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया था और अब सोशल मीडिया पर भी पुरानी पदवी को बनाए रखा है।

15 साल बाद सत्ता से बाहर हुई TMC

तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार 15 साल तक सत्ता में रही। 2021 के चुनाव में जीत हासिल कर ममता बनर्जी तीसरी बार मुख्यमंत्री बनी थीं। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव (2026 West Bengal Assembly Election) में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। टीएमसी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा (BJP) ने 293 सीटों में से 207 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया।ममता बनर्जी खुद भवानीपुर सीट (Bhabanipur Seat) पर हार गईं। हार के बाद उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग (Election Commission) पर ‘100 सीटों की चोरी’ का आरोप लगाया और नतीजों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

नई सरकार की तैयारी

विधानसभा भंग होने के साथ ही अब पश्चिम बंगाल (West Bengal) में नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। भाजपा (BJP) अपने मुख्यमंत्री (Chief Minister) के चयन की कवायद में जुटी हुई है। ममता बनर्जी के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर अभी भी पुराना टैग बरकरार रहने को राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग इसे हार स्वीकार न करने का संकेत मान रहे हैं।

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