रीवा। जबलपुर के बरगी डैम में हुए उस हृदयविदारक क्रूज हादसे की यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं, जिसमें 13 मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गई थीं। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि रीवा जिला प्रशासन इस भयानक सबक को पूरी तरह भुला चुका है। जिले की त्योंथर तहसील अंतर्गत टमस नदी के चिल्ला घाट पर सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर ‘मौत का सफर’ बदस्तूर जारी है, जो किसी भी वक्त एक बड़ी जल त्रासदी का रूप ले सकता है।
चिल्ला घाट की स्थिति वर्तमान में बेहद डरावनी है। यहाँ हर दिन कॉलेज के छात्र-छात्राएं, महिलाएं और छोटे बच्चे उफनती लहरों के बीच अपनी जान हथेली पर रखकर नदी पार करने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि इन नावों में न तो कोई लाइफ जैकेट है और न ही सुरक्षा का कोई अन्य इंतजाम। नाविक मुनाफे के चक्कर में एक छोटी सी नाव में क्षमता से दोगुने यानी 10 से 15 लोगों को एक साथ बैठा रहे हैं। सुरक्षा मानकों की यह अनदेखी किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन को इस गंभीर खतरे से अवगत कराया है, लेकिन अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी और उदासीनता ने अब जनता में आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि क्या शासन और प्रशासन को केवल किसी बड़ी अनहोनी और ‘लाशों के ढेर’ का इंतजार है, तभी उनकी कुंभकर्णी नींद टूटेगी? यदि समय रहते चिल्ला घाट पर नावों के संचालन को लेकर सख्त नियम लागू नहीं किए गए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए, तो रीवा को एक ऐसी कीमत चुकानी पड़ सकती है जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं होगी।




