Madhya Pradesh UCC Implementation: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उत्तराखंड के बाद अब MP भी ऐसा दूसरा बड़ा राज्य बन सकता है, जहां सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति और पारिवारिक अधिकारों को लेकर एक समान कानून लागू किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने UCC का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में यह विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है।
सबसे बड़ा बदलाव: लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी ढांचा
प्रस्तावित UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बड़े प्रावधान रखे गए हैं। अब तक लिव-इन संबंध मुख्य रूप से अदालतों की व्याख्याओं पर आधारित थे, लेकिन नए कानून के बाद इन्हें एक स्पष्ट कानूनी ढांचे में लाया जा सकता है।
ड्राफ्ट के अनुसार लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपने संबंध का रजिस्ट्रेशन या डिक्लेरेशन कराना पड़ सकता है। यदि संबंध टूटता है, तो महिला को भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा।
बच्चों को मिलेगा पूर्ण वारिसाना हक
सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में वैध उत्तराधिकारी माना जाएगा।
यानी ऐसे बच्चों को “नाजायज” कहने की सामाजिक और कानूनी बहस लगभग समाप्त हो जाएगी। उन्हें संपत्ति, उत्तराधिकार और भरण-पोषण के वही अधिकार मिलेंगे जो विवाह से जन्मे बच्चों को प्राप्त होते हैं।
महिलाओं को मिलेंगे बराबरी के अधिकार
UCC के तहत संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा तलाक के नियम भी सभी धर्मों के लिए समान होंगे। किसी भी प्रकार के तलाक को वैध मानने के लिए उसका कोर्ट या सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा। गुजारा भत्ता और एलिमनी के नियम भी एक जैसे लागू होंगे।
क्या खत्म हो जाएंगे अलग-अलग पर्सनल लॉ?
ड्राफ्ट के अनुसार विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति से जुड़े मामलों में अलग-अलग धार्मिक पर्सनल लॉ की जगह एक समान कानून लागू होगा।
सरकार का दावा है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में दिए गए समानता के अधिकार को मजबूत करेगा, जबकि धार्मिक स्वतंत्रता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या भारतीय समाज लिव-इन रिलेशनशिप को सामाजिक मान्यता देगा? उन्होंने यह भी पूछा कि जब आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जा रहा है, तो इसे “यूनिफॉर्म” सिविल कोड कैसे कहा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने दिए स्पष्ट संकेत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार UCC को लेकर गंभीर है और यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आगामी मानसून सत्र में इसे विधानसभा से पारित कराया जा सकता है।
यदि ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां विवाह, तलाक, संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू होगा।




