नई दिल्ली का दिल माना जाने वाला जंतर-मंतर इस वक्त देश के सबसे अनोखे और बड़े युवा आंदोलनों का गवाह बन रहा है। देश में बार-बार हो रहे सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक (Exam Paper Leaks) और बेरोजगारी (Youth Unemployment) के खिलाफ शुरू हुआ डिजिटल विरोध अब सड़कों पर एक बड़े जनसैलाब में बदल चुका है। सोमवार, 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) के पहले ही दिन, युवा नेतृत्व वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी‘ (Cockroach Janta Party – CJP) ने दिल्ली पुलिस की पाबंदियों को दरकिनार करते हुए ‘संसद चलो’ (Sansad Chalo) मार्च का एलान कर दिया है। यह आंदोलन तब और उग्र हो गया जब शनिवार को 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे मशहूर पर्यावरणविद् और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को पुलिस ने जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।
कॉकरोच आंदोलन का इतिहास: एक ‘कमेंट’ से कैसे बनी ‘पार्टी’?
यह सवाल हर किसी के जेहन में है कि आखिर इस आंदोलन का नाम ‘कॉकरोच’ क्यों पड़ा? दरअसल, यह पूरा आंदोलन सत्ता और न्यायपालिका के प्रति युवाओं के तीखे व्यंग्य (Satire) से जनमा है।
मई 2026 में एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कथित तौर पर कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से कर दी थी। इस अपमान को युवाओं ने एक हथियार बना लिया। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) ने इस पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म खड़ा कर दिया। युवाओं का कहना था: “अगर हम आपके सिस्टम के लिए कॉकरोच की तरह तुच्छ हैं, तो याद रखिए कि कॉकरोच को खत्म करना सबसे मुश्किल होता है।” कुछ ही हफ्तों में इस डिजिटल अभियान से सोशल मीडिया पर लाखों छात्र और युवा जुड़ गए।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और पुलिसिया कार्रवाई
लद्दाख की मांगों को लेकर चर्चा में रहने वाले सोनम वांगचुक ने इस बार देश के युवाओं और छात्रों के हक में आवाज उठाई। NEET-UG और अन्य प्रमुख सरकारी परीक्षाओं में हुई धांधली और पेपर लीक के खिलाफ वांगचुक जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए।
- 21 दिनों का उपवास: वांगचुक ने लगभग तीन हफ्तों तक सिर्फ पानी और तरल पदार्थों पर रहकर उपवास किया, जिससे उनका वजन करीब 10 किलो गिर गया।
- जबरन अस्पताल में शिफ्टिंग: शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने उनके बिगड़ते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल पहुंचा दिया। पुलिस की इस कार्रवाई को CJP ने “अवैध हिरासत” और “अपहरण” करार दिया।
- अदालत का रुख: दिल्ली हाई कोर्ट ने हालांकि सरकार के इस कदम को सही ठहराया और कहा कि मेडिकल इमरजेंसी में वांगचुक के जीवन की रक्षा करना प्रशासन का अधिकार है。
वांगचुक को हटाए जाने के तुरंत बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुद मोर्चा संभालते हुए जंतर-मंतर पर ही आमरण अनशन शुरू कर दिया है, जिसने आंदोलन की आग में घी का काम किया।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें
पूरे देश से (जैसे कानपुर, इलाहाबाद और महाराष्ट्र) दिल्ली पहुंचे युवाओं की मांगें बेहद स्पष्ट और सीधी हैं:
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: CJP और प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- परीक्षा प्रणाली में सुधार: NEET और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए कड़े कानूनी और तकनीकी सुधार किए जाएं।
- मुआवजे की मांग: पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा मिले。
- जवाबदेही तय हो: अब तक हुए सभी पेपर लीक मामलों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष न्यायिक जांच हो।
दिल्ली पुलिस का कड़ा पहरा: छावनी में तब्दील हुआ लुटियंस ज़ोन
मानसून सत्र के पहले ही दिन होने वाले इस मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में सख्त सुरक्षा घेरा तैयार किया है:
- धारा 163 BNSS लागू: लुटियंस दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पुरानी धारा 144 CrPC) लागू कर दी गई है, जिसके तहत 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने या मार्च निकालने पर पूरी तरह पाबंदी है।
- भारी बैरीकेडिंग: संसद भवन, मंत्रियों के आवास और जंतर-मंतर के चारों ओर तीन-स्तरीय बैरिकेड्स, वाटर कैनन, और दंगा नियंत्रण वाहनों को तैनात किया गया है। अर्धसैनिक बलों (Paramilitary forces) की 12 से अधिक कंपनियों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।
- टकराव की स्थिति: पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए छात्रों को तितर-बितर होने की चेतावनी दी है, जबकि CJP के प्रवक्ताओं का कहना है कि वे इन “औपनिवेशिक कानूनों” को चुनौती देते हुए शांतिपूर्ण मार्च जारी रखेंगे।
निष्कर्ष (Conclusion)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में यह आंदोलन सरकार के सामने अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक और युवा-केंद्रित चुनौती बनकर उभरा है। जहां सरकार के कुछ मंत्री इसे राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा प्रेरित बता रहे हैं, वहीं विपक्ष, नागरिक समाज और बॉलीवुड की कुछ हस्तियों का समर्थन मिलने से ‘कॉकरोच आंदोलन‘ राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गया है। सरकार ने बातचीत के शुरुआती संकेत देते हुए CJP के कुछ प्रतिनिधियों से मुलाकात की बात कही है, लेकिन जब तक परीक्षा प्रणाली में कोई ठोस और पारदर्शी बदलाव नहीं दिखता, तब तक भारत के युवाओं का यह गुस्सा शांत होना मुश्किल नजर आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) क्या है?
Ans: यह भारत के बेरोजगार और पेपर लीक से परेशान युवाओं द्वारा शुरू किया गया एक व्यंग्यात्मक और सोशल मीडिया-संचालित आंदोलन है। इसकी शुरुआत मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एक कथित टिप्पणी के बाद युवाओं के हक की लड़ाई के रूप में हुई थी।
Q2: सोनम वांगचुक क्यों विरोध कर रहे थे?
Ans: सोनम वांगचुक देश में लगातार हो रहे प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक (जैसे NEET स्कैम) और शिक्षा प्रणाली में व्यापक भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर-मंतर पर 21 दिनों से भूख हड़ताल पर थे।
Q3: दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च की अनुमति क्यों नहीं दी?
Ans: दिल्ली पुलिस ने संसद के मानसून सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, वीआईपी मूवमेंट और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए इस मार्च को प्रतिबंधित किया है और नई दिल्ली में धारा 163 BNSS लागू की है。
Q4: प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
Ans: प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक मामलों की न्यायिक जांच और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में कड़े प्रशासनिक सुधार करना है।
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