रीवा कलेक्ट्रेट में फरियादियों की भारी भीड़, बदहाल सड़कें, बंद रास्ते और पीएम आवास के लिए भटके लोग

Huge crowd of complainants in Rewa Collectorate

रीवा। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से पीड़ितों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में प्रभारी कलेक्टर अक्षत जैन के समक्ष शिकायतों का अंबार लग गया, जहां शासकीय दावों के विपरीत जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती नजर आई। कलेक्ट्रेट पहुंचे कई पीड़ितों ने प्रशासनिक ढिलाई पर मायूसी जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से सिर्फ चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें धरातल पर कोई ठोस न्याय नहीं मिल सका है।

दबंगों ने रोका दिव्यांग दंपत्ति का रास्ता, पीएम आवास की राशि के लिए भटक रहा परिवार
जनसुनवाई में उस वक्त एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया जब सेमरिया तहसील के ग्राम खड्डाकंजी से एक दिव्यांग दंपत्ति न्याय की गुहार लगाने कलेक्ट्रेट भवन पहुंचा। पीड़ित दिव्यांग महिला रश्मि पांडे और उनके पति त्रिसूदन पांडे ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि गांव के कुछ रसूखदारों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर उनके घर का मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे उनका घर से निकलना भी दूभर हो गया है। वे लंबे समय से तहसील से लेकर जिला मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। इसी तरह रायपुर कर्चुलियान ब्लॉक के ग्राम बरेही से आए संतलाल यादव ने अपनी पत्नी और मासूम बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में गुहार लगाई। संतलाल ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृत राशि न मिलने के कारण उनका मकान आधा-अधूरा पड़ा है और वे तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कलेक्टर से जल्द से जल्द किश्त जारी कराने की मांग की ताकि वे अपने परिवार के लिए दो कमरों का आशियाना बना सकें।

मानसून आते ही सताने लगी बदहाल रास्तों की चिंता, सड़कों की मांग को लेकर उमड़े ग्रामीण
मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही रीवा जिले के ग्रामीण इलाकों में बदहाल, जर्जर और कच्चे रास्तों की समस्या एक बार फिर विकराल रूप धारण करने लगी है। इसी के चलते मंगलवार को जनसुनवाई में सड़क निर्माण और बंद रास्ते खुलवाने से जुड़े आवेदनों की बाढ़ आ गई। रायपुर कर्चुलियान के पतौता गांव निवासी अतुल और विपिन पांडे ने महई तालाब से बरहदी तक के ३ किलोमीटर लंबे पहुंच मार्ग के निर्माण की पुरजोर मांग उठाई। ग्रामीणों ने बताया कि पिछली बरसात में इस कीचड़युक्त मार्ग की बदहाली को मीडिया (‘शब्द सांची’ की ग्राउंड रिपोर्ट) द्वारा प्रमुखता से उजागर किया गया था, लेकिन प्रशासन ने फिर भी कोई सुध नहीं ली। इसके अलावा रायपुर कर्चुलियान के ही जोगिनहाई गांव से पहुंचे कामता सिंह ने दर्द बयां किया कि उनका गांव पिछले 35 वर्षों से एक पक्की सड़क के लिए तरस रहा है; पूर्व में बनी मुरम की सड़क अब पूरी तरह जर्जर होकर गड्डों में तब्दील हो चुकी है।

त्यौथर, सिरमौर और हुजूर से भी पहुंचे पीड़ित, प्रभारी कलेक्टर ने दिया त्वरित निराकरण का आश्वासन
सड़क और रास्तों की बदहाली को लेकर जिले के अन्य हिस्सों से भी बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। त्यौथर के भगवानपुरा गांव से आए शिवकुमार मांझी ने गांव में नई सड़क निर्माण की मांग रखी, तो वहीं सिरमौर के रंगौली गांव निवासी रामकिशोर चौधरी ने दबंगों द्वारा बंद किया गया रास्ता खुलवाने और कृषि भूमि के समानीकरण की गुहार लगाई। इसके अतिरिक्त, हुजूर तहसील के बिहरिया गांव से पहुंचे लालमणि साकेत ने एक गंभीर शिकायती आवेदन सौंपते हुए पूर्व सरपंच ममता सिंह के कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। मामलों की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी कलेक्टर अक्षत जैन ने सभी आवेदनों को संबंधित विभागों के अधिकारियों को मार्क किया और कड़ी हिदायत देते हुए सभी फरियादियों को जल्द से जल्द उचित व समयबद्ध निराकरण का भरोसा दिलाया है।

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