एमपी पोलटिक्ल न्यूज। मध्यप्रदेश कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो जाने से अब राजनैतिक सियासत गर्मा गई है। बीजेपी की इससे बल्ले-बल्ले है, क्योकि राज्यसभा की अब तीनों सीटों पर बीजेपी का कब्जा हो गया है, तो वही राज्यसभा में एमपी से कांग्रेस बाहर हो गई है, जबकि बोट ऑफ प्रतिशत को देखा जाए तो एमपी से कांग्रेस को एक सीट जीतने की पूरी उम्मीद थी, दरअसल राज्यसभा के एक उम्मीदवार के लिए 57 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 229 विधायक है। जिसमें से बीजेपी के दो राज्यसभा सदस्य बनना तय हो गया था, जबकि तकरीबन 9-10 विधायकों की संख्या कंम होने से एक सीट कांग्रेस के पाले में जाने की उम्मीद पूरी तरह से बन गई थी। नामांकन फार्म में चूक होने से कांग्रेस की राज्यसभा सीट हाथ से निकल गई।
हाईकमान की नजरें तिरछी
एमपी में चल रहे राजनैतिक घटना क्रम के बीच ऐसी चर्चा है कि राज्यसभा की जीती हुई सीट गंवाने को लेकर राहुल गांधी बेहद खफा, दिल्ली में हुई बैठक में एमपी के नेताओं की ओर राहुल गांधी ने देखा भी नहीं। ऐसे में जो खबरें आ रही है उसके तहत कांग्रेस के कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं पर हाई कमान की गाज गिर सकती है और हाईकमान एमपी में बदलाव कर सकता है।
आखिर क्यों रद्द हुआ नामांकन?
मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा इसलिए रद्द किया गया, क्योंकि उन पर अपने चुनावी हलफनामे में एक लंबित मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगा था। यह आपत्ति बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट द्वारा दर्ज कराई गई थी। बीजेपी का आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन ने फॉर्म-26 में अपने खिलाफ दर्ज एक मामले (प्राइवेट कंप्लेंट) की जानकारी छुपाई थी। इस पर चुनाव अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था। बीजेपी के उम्मीदवार निविरोध घोषित हो चुके है। अब कोर्ट से भी मीनाक्षी को राहत नही मिली है।




