MP High Court News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने डबरा क्षेत्र में कथित अवैध खनन पर सख्त रुख अपनाते हुए 16 खनन पट्टों पर तत्काल प्रभाव से खनन गतिविधियां बंद करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने करीब नौ वर्षों से लंबित कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना। साथ ही ग्वालियर कलेक्टर को अवैध खनन और परिवहन पर रोक की व्यक्तिगत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय के समक्ष झूठी या भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करना न्यायिक प्रक्रिया के साथ गंभीर छल है और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
MP High Court News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने डबरा क्षेत्र में कथित अवैध खनन और प्रशासनिक लापरवाही को गंभीर मानते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने 16 खनन पट्टों (Mining Leases) पर तत्काल प्रभाव से खनन गतिविधियां रोकने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही डबरा के एसडीओ रूपेश रतन सिंघई द्वारा अदालत में कथित रूप से भ्रामक और अधूरी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करने पर उनके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू करने के आदेश भी दिए हैं।
भ्रामक रिपोर्ट पर अदालत की कड़ी टिप्पणी
न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायालय के समक्ष गलत या अधूरी जानकारी रखना न्यायिक प्रक्रिया के साथ गंभीर छल है। यह टिप्पणी अकबर खान की ओर से दायर जनहित याचिका (Public Interest Litigation-PIL) की सुनवाई के दौरान की गई।
2017 से लंबित हैं कार्रवाई के मामले
राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड की जांच में अदालत ने पाया कि वर्ष 2017 में अवैध खनन के आरोपों में जारी किए गए कई कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) अब तक लंबित हैं। अदालत ने यह भी माना कि करोड़ों रुपये की रॉयल्टी (Royalty) और पेनाल्टी (Penalty) की वसूली नहीं की गई, जबकि कई मामलों में संबंधित खनन पट्टों का बाद में नवीनीकरण (Renewal) भी कर दिया गया।
बच्चन सिंह का मामला भी जांच के दायरे में
सुनवाई के दौरान अदालत ने बच्चन सिंह से जुड़े मामले का विशेष उल्लेख किया। रिकॉर्ड के अनुसार उन पर स्वीकृत क्षेत्र से बाहर करीब 1.40 लाख घनमीटर खनिज निकालने का आरोप है। इस मामले में 21.04 करोड़ रुपये की रॉयल्टी और 17.53 करोड़ रुपये की पेनाल्टी प्रस्तावित थी, लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2020 में उनके खनन पट्टे का नवीनीकरण कर दिया गया। अदालत ने पूछा कि लंबित बकाया के बावजूद बिना नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (No Dues Certificate) के नवीनीकरण कैसे किया गया।
अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान एसडीओ रूपेश रतन सिंघई ने स्वीकार किया कि अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने से पहले उन्होंने अधिकांश खनन क्षेत्रों का निरीक्षण नहीं किया था। कई मामलों में वे यह भी स्पष्ट नहीं कर सके कि संबंधित क्षेत्रों में वर्तमान में खनन जारी है या नहीं। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि यह या तो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है या फिर गलत तत्वों को संरक्षण देने जैसा रवैया प्रतीत होता है।
कलेक्टर को दिए सख्त निर्देश, सीसीटीवी फुटेज भी तलब
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर ने अदालत को बताया कि ग्वालियर कलेक्टर अवैध खनन रोकने की कार्रवाई कर रही हैं। इसके बाद कलेक्टर रुचिका चौहान को न्यायालय में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। हाई कोर्ट ने सभी 16 खनन पट्टों पर तत्काल रोक सुनिश्चित करने के साथ कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से यह देखने के निर्देश दिए कि अवैध खनन और अवैध परिवहन पूरी तरह बंद हो।
ई-चेक पोस्ट का रिकॉर्ड भी मांगा
अदालत ने सभी ई-चेक पोस्ट (E-Check Post) के डीवीआर (DVR) जब्त कर सीलबंद लिफाफे में सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) और ई-परमिट (E-Permit/ETP) का रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि रिकॉर्ड से छेड़छाड़ या फुटेज गायब मिली तो इसे साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास माना जाएगा। एसडीओ रूपेश रतन सिंघई को अवमानना मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। वहीं, मुख्य मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई और अवमानना प्रकरण की सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की गई है।




