कनाडा के केंद्रीय बैंक Bank of Canada ने 15 जुलाई 2026 को अपनी प्रमुख नीति ब्याज दर को 2.25% पर स्थिर रखने का फैसला लिया है। बैंक ने कहा कि अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार होने के संकेत भी मिल रहे हैं लेकिन महंगाई ऊर्जा की कीमत और वैश्विक व्यापार से जुड़े रिस्क अभी भी बने हुए नजर आ रहे हैं। इस फैसले का असर बैंकिंग हाउसिंग और वित्तीय बाजार पर देखने को मिल रहा है।

Bank of Canada ने क्यों नहीं बदली है ब्याज दर?
बैंक ऑफ़ कनाडा के ऑफिशियल बयान के अनुसार मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए नीति दर को 2.25% बनाए रखना उचित माना गया है। बैंक के अनुसार उपभोक्ता खर्च और कारोबारी निवेश में सुधार अब दिखाई देने लगा है जबकि श्रम बाजार भी अपेक्षाकृत स्थिर माहौल में बना हुआ है। हालांकि ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चित के कारण महंगाई पर दबाव पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।
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महंगाई और risk बने हुए है चिंता के विषय
केंद्रीय बैंक में दो प्रमुख रिस्क की ओर संकेत किया है पहले मध्य पूर्व देशों में जारी भू राजनीतिक तनाव जिस राजनीतिक तनाव होने से ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है वहीं दूसरा अमेरिका के व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चित जिसका असर वैश्विक व्यापार और कनाडा के निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है। बाजार विश्लेषण को के अनुसार अगर आने वाले महीना में महंगाई लगातार 2% लक्ष्य के करीब दिखाई देती है और साथ ही आर्थिक गतिविधियां मजबूत होती है तभी भविष्य में विकास दरों में बदलाव पर विचार हो सकता है।
इसका वित्तीय बाजार और निवेशकों पर संभावित असर
ब्याज दर स्थिर रहने से फिलहाल होम लोन बिजनेस लोन और अन्य उधर की लागत में तत्काल कोई बदलाव नहीं देखने को मिलेगा। बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए या फैसला स्थिरता का संकेत बताया जा रहा है फाइनेंशियल बाजारों में भी इस फैसिलिटी की काफी हद तक उम्मीद की जा रही है इसलिए बड़े उतार चढ़ाव की संभावना भी सीमित दिख रहीहै। बाजार के अनुसार आगे की मौद्रिक नीति पूरी तरह से महंगाई रोजगार और आर्थिक विकास से जुड़े आंकड़े पर ही निर्भर होने वाली है।
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अब आगे क्या रहेगा Bank of Canada का फोकस?
कंपनी के ऑफिशियल बयान में बताया गया है कि केंद्रीय बैंक भविष्य के आर्थिक आंकड़ों का लगातार मूल्यांकन करने वाला है। अगर महंगाई अपेक्षा से ज्यादा बनी रहती है या फिर वैश्विक रिस्क बढ़ाते हैं तो मौद्रिक नीति में बदलाव की संभावना से बिल्कुल भी इनकार नहीं हो सकता है। वहीं आर्थिक गतिविधियों में संतुलित सुधार जारी रहने पर वर्तमान नीति को कुछ समय तक बनाए रखा जा सकता है। हालांकि यह फैसला वैश्विक निवेशकों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियां अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रभाव मुद्रा बाजार और निवेश धारणा को प्रभावित करती दिख रही है। यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से इसको निवेश की सलाह के तौर पर नहीं देखे।




