मुंबई: महाराष्ट्र में मानसून की लंबी बेरुखी के कारण खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की 86 तहसीलों में 5 अक्टूबर से सूखे जैसी स्थिति का औपचारिक आकलन शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्रियों ने फसलों की बिगड़ती हालत पर गंभीर चिंता व्यक्त की। इसके तुरंत बाद प्रशासनिक अधिकारियों को जमीनी स्तर पर फसल नुकसान सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण प्रक्रिया तेज करने के आदेश दिए गए।
"प्रशासन को औपचारिक पंचनामा प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना तत्काल प्रभाव से सूखा एवं अकाल राहत उपाय शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। फसलों के नुकसान और पेयजल की स्थिति का ब्यौरा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के मानदंडों के अनुसार दर्ज किया जाएगा।"
— राज्य मंत्रिमंडल फैसला86 तहसीलों में गहराया संकट: कम अवधि की दलहनी फसलें तबाह
मौसम की अनिश्चितता और 1 जून से 15 सितंबर के दौरान देश भर में दर्ज की गई 15 प्रतिशत कम बारिश का सबसे गंभीर असर महाराष्ट्र के वर्षा आधारित क्षेत्रों पर पड़ा है।
विशेष रूप से बारिश पर निर्भर रहने वाली कम अवधि की दलहनी फसलें—जैसे मूंग, मटकी और चवली—पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। पर्याप्त नमी न मिलने से गन्ने की फसल की वृद्धि रुक गई है और नए लगाए गए गन्ने पर सूखने का खतरा मंडरा रहा है।
अगस्त-सितंबर में कमजोर पड़ा मानसून
अर्बन एकर्स (Urban Acres) की रिपोर्ट और मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त और सितंबर के महीनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की गतिविधि महाराष्ट्र में अत्यधिक कमजोर रही।
प्रमुख आंकड़े:
- प्रभावित क्षेत्र: राज्य की 86 से अधिक तहसीलें।
- मानसून की वापसी: लगभग 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से शुरू होने की संभावना।
- फसल क्षति का दायरा: दलहनी (मूंग, मटकी, चवली) एवं वाणिज्यिक फसलें (गन्ना)।
- मूल्यांकन मानक: राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत राहत आवंटन।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून अब अपनी वापसी के चरण में प्रवेश कर रहा है, जिससे देर से होने वाले सुधार की उम्मीदें काफी सीमित हैं। जिन फसलों को पहले ही नुकसान हो चुका है, वे अब रिकवर नहीं हो सकतीं।
NDRF मानदंडों के तहत तय होगा राहत पैकेज
राज्य सरकार द्वारा 5 अक्टूबर से शुरू किया जाने वाला आधिकारिक पंचनामा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तय मानकों के अनुसार होगा।
इस जमीनी मूल्यांकन से राज्य में पानी की कमी और वास्तविक कृषि नुकसान का सटीक आंकड़ा सामने आएगा, जिसके आधार पर केंद्र से वित्तीय सहायता और किसानों के लिए मुआवजे का पैमाना तय किया जाएगा।
व्यापक ई-ई-ए-टी (E-E-A-T) ट्रस्ट मानकों के तहत, कृषि मंत्रालय और आपदा प्रबंधन विभाग के समन्वय से राहत कार्यों की वास्तविक समय में निगरानी की जाएगी।
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Q1. महाराष्ट्र में फसल नुकसान का औपचारिक आकलन कब से शुरू होगा?
Ans: महाराष्ट्र में फसल नुकसान का औपचारिक आकलन 5 अक्टूबर से शुरू होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे 86 प्रभावित तहसीलों में फसलों की क्षति और पानी की कमी का दस्तावेजीकरण NDRF मानदंडों के अनुसार पूरा करें।
Q2. महाराष्ट्र में किन फसलों पर सूखे का सबसे ज्यादा असर पड़ा है?
Ans: सूखे के कारण सबसे ज्यादा नुकसान मूंग, मटकी और चवली जैसी कम अवधि की दलहनी फसलों को हुआ है। इसके अलावा, अपर्याप्त नमी की वजह से गन्ने की वृद्धि धीमी हो गई है और नई गन्ने की फसलों को भी गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
Q3. महाराष्ट्र में कितने क्षेत्र सूखे जैसी स्थिति से प्रभावित हैं?
Ans: महाराष्ट्र में कम से कम 86 तहसीलें मानसून की बेरुखी और बारिश की कमी से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश न होने से वर्षा आधारित खरीफ फसलों पर गहरा संकट पैदा हो गया है, जिससे सरकार ने तत्काल राहत कार्य शुरू किए हैं।
Q4. क्या किसानों को राहत पाने के लिए पंचनामा पूरा होने का इंतजार करना होगा?
Ans: नहीं, किसानों को राहत पाने के लिए औपचारिक पंचनामा प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे 5 अक्टूबर के सर्वे से पहले ही तत्काल प्रभाव से सूखा राहत उपाय लागू करना शुरू कर दें।
Q5. क्या मानसून की वापसी से फसलों की स्थिति में सुधार की संभावना है?
Ans: मानसून की वापसी से फसलों में सुधार की संभावना काफी सीमित है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की वापसी सितंबर के उत्तरार्ध से शुरू हो चुकी है, इसलिए जिन खरीफ फसलों को नमी की कमी से पहले ही नुकसान पहुंच चुका है, उनमें सुधार संभव नहीं है।
निष्कर्ष: आगे क्या होगा?
महाराष्ट्र सरकार का प्राथमिक ध्यान 5 अक्टूबर से शुरू होने वाले आधिकारिक आकलन के लिए जमीनी प्रशासनिक ढांचा तैयार करने पर है। आगामी हफ्तों में, 86 तहसीलों से प्राप्त फसल क्षति सर्वेक्षण डेटा के आधार पर राज्य सरकार वित्तीय सहायता की मांग का प्रस्ताव NDRF को भेजेगी।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार कितने गांवों को इस विशेष राहत के दायरे में लाती है और प्रभावित किसानों को अंतरिम मुआवजा कितनी तेजी से ट्रांसफर किया जाता है।




