दिल्ली SIR: मतदान केंद्र पर पहले 729 मतदाता, ड्राफ्ट सूची में बचा सिर्फ एक नाम

नई दिल्ली। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाता सूची में बड़े बदलाव सामने आ रहे हैं। चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर ऐसा मामला सामने आया है, जहां SIR से पहले 729 मतदाता दर्ज थे। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में इनमें से सिर्फ एक नाम बचा है।

इस बूथ के कई ऐसे मतदाता हैं, जिन्होंने 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान किया था। इसके बावजूद उनके नाम नई ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। अब इन लोगों को दोबारा अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन करना होगा।

चांदनी चौक के बूथ पर 729 से सिर्फ एक मतदाता

यह मामला लाल किला यमुना ब्रिज, विजय घाट स्थित जेजे बेला एस्टेट के मतदान केंद्र से जुड़ा है। यह चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 33 में आता है।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रिकॉर्ड के मुताबिक, SIR से पहले यहां 729 मतदाता थे। 31 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट सूची में सिर्फ एक मतदाता का नाम शामिल हुआ।

इस मामले में चांदनी चौक निवासी गायत्री देवी का नाम भी ड्राफ्ट सूची से गायब है। वह लंबे समय से बीजेपी की बूथ लेवल एजेंट (BLA) रही हैं। उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव में भी मतदान किया था।

729 मतदाताओं में 632 के नाम दूसरी जगह जाने की श्रेणी में

SIR से जुड़े रिकॉर्ड में 729 मतदाताओं की स्थिति का भी उल्लेख है। इनमें 632 मतदाताओं को स्थानांतरित, 42 को मृत और 10 को डुप्लीकेट बताया गया है। इसके अलावा 43 मतदाताओं को ‘Others’ श्रेणी में रखा गया है। रिकॉर्ड में इस श्रेणी में फॉर्म पर हस्ताक्षर से इनकार और इलाके में निर्माण हटाए जाने जैसी वजहों का उल्लेख किया गया है।

इलाके में पहले हो चुका है निर्माण हटाने का काम

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में पहले झुग्गी-बस्तियों को हटाने की कार्रवाई हुई थी। इसके कारण SIR के दौरान कई लोग अपने पुराने पते पर नहीं मिले। इसी वजह से उनके नामों को स्थानांतरित या अन्य श्रेणियों में डाल दिया गया। हालांकि, इस मामले में अंतिम स्थिति ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

गायत्री देवी बोलीं- दशकों से यहीं रह रही हूं

BJP की BLA रही गायत्री देवी ने बताया कि उनका नाम ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ लोगों की सूची में डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि वह दशकों से इसी इलाके में रह रही हैं। उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र और जमीन से जुड़े दस्तावेज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके माता-पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी मां को स्वतंत्रता सेनानी पेंशन मिलती थी।गायत्री देवी ने सवाल उठाया कि इतने दस्तावेज होने के बावजूद उनका नाम मतदाता सूची से कैसे हट गया।

एक व्यक्ति ने 500 लोगों के फॉर्म भरने में मदद की

इसी इलाके के एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उनका नाम 2025 की मतदाता सूची में था। इस बार उन्हें भी स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है।उन्होंने दावा किया कि SIR के दौरान उन्होंने करीब 500 लोगों के फॉर्म भरने में मदद की थी। इसके बावजूद उनका नाम भी ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है।

विपक्ष ने SIR को लेकर सरकार पर सवाल उठाए

दिल्ली में SIR के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने को लेकर विपक्षी दलों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा समेत विपक्षी नेताओं ने SIR की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि इसका असर गरीबों, प्रवासियों और अस्थायी बस्तियों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है।

वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने का मतलब अंतिम तौर पर नाम हट जाना नहीं है। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाता अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

नाम नहीं है तो क्या करें?

ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर पात्र व्यक्ति Form 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। वहीं, अगर किसी मतदाता को अपना पता दूसरी जगह स्थानांतरित कराना है तो Form 8 का इस्तेमाल किया जाता है। दिल्ली के CEO कार्यालय ने भी इस अंतर को स्पष्ट किया है। दिल्ली में SIR की दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।

दिल्ली में 47.56 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं

दिल्ली में SIR से पहले कुल 1,45,10,299 मतदाता दर्ज थे। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में 97,53,577 मतदाताओं के नाम शामिल किए गए। इस तरह 47,56,722 नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। यह कुल मतदाताओं का करीब 32.8% यानी लगभग एक-तिहाई है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इन 47.56 लाख नामों में से 43,32,775 मतदाता स्थानांतरित या सत्यापन के दौरान अनुपलब्ध पाए गए। वहीं 2,82,412 मतदाताओं की मृत्यु दर्ज की गई और 1,41,535 नाम डुप्लीकेट या एक से ज्यादा जगह दर्ज पाए गए।

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