Credit Card cash withdrawal: क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने पर बढ़ते खर्च और रिस्क को लेकर हाल ही में जानकारी दी गई है। 2026 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इस सुविधा पर 36 प्रतिशत से लेकर 48% तक का सालाना ब्याज वसूला जा रहा है। ये उपभोक्ताओं के फाइनेंशियल situation और क्रेडिट प्रोफाइल पर negative असर डाल सकता है।

Credit Card Cash Withdrawal कितना महंगा ऑप्शन है?
क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना बहुत आसान होता है लेकिन इसकी लागत बहुत अधिक होती है। स्टॉक एक्सचेंज डाटा और बैंकिंग स्रोत के अनुसार कैश एडवांस पर 2.5% से लेकर 3% तक की प्रोसेसिंग फीस ले ली जाती है जो की न्यूनतम 300 से ₹500 तक हो सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि इस ट्रांजैक्शन पर कोई interest-free period नहीं मिलता है। जिसका मतलब है कि पैसा निकालते ही ब्याज लागू हो जाता है जिससे कुल देनदारी तेजी से बढ़ने लगती है।
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Credit Card के उपयोग का CIBIL स्कोर पर क्या है असर
बार-बार क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना फाइनेंशियल दावों का संकेत बताया जाता है इससे यूजर का सिविल स्कोर भी प्रभावित हो सकता है। कम क्रेडिट स्कोर का असर भविष्य में होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने पर ब्याज दरों पर देखने को मिल सकता है। बैंक और एनबीएफसी ऐसे ग्राहकों को उच्च रिस्क की श्रेणी में रखते हैं जिससे लोन महंगा या फिर रिजेक्ट भी किया जा सकता है।
क्रेडिट कार्ड के बढ़ते उपयोग के पीछे क्या कारण?
2026 में डिजिटल पेमेंट का विस्तार समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है इसके साथ ही क्रेडिट कार्ड का उपयोग भी लोग तेजी से कर रहे हैं। हालांकि कॅश विड्रो का हिस्सा कल ट्रांजैक्शन की राशि से कम होता है फिर भी यह एक स्थिर ट्रेड का हिस्सा बना हुआ है। अचानक नगदी की जरूरत या फिर इमरजेंसी में खर्च करने के साधनों की कमी के कारण लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर लेते हैं। हालांकि इसे नियमित फाइनेंशियल टूल के रूप में इस्तेमाल करना रिस्क का होता है।
बेहतर विकल्प और विशेषज्ञों की राय क्या है
फाइनेंशियल विशेषज्ञ ऐसा सलाह देते हैं कि Credit Card Cash Withdrawal के बजाय पर्सनल लोन या इमरजेंसी फंड का उपयोग करना बेहतर ऑप्शन होता है। पर्सनल लोन पर ब्याज दर आम तौर पर 10% से 18% के बीच होती है जो की क्रेडिट कार्ड कैश एडवांस से काफी कम है। इसके अलावा Emi विकल्प होने से भुगतान का बोझ भी कम होता है।
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क्या है आगे का आउटलुक
बाजार विश्लेषण को के अनुसार आने वाले समय में बैंक और नियामक संस्थाएं इसी तरह के मांगे ट्रांजैक्शन पर और भी ज्यादा सख्ती कर सकती है। उपभोक्ताओं के बीच फाइनेंशियल जागरूकता बढ़ने से भी इस ट्रेंड में कमी आने की संभावना देखी जा सकती है। हालांकि ऐसा स्पष्ट है कि यह केवल अनुमान है और व्यक्तिगत वित्तीय निर्णय सोच समझ कर लेना चाहिए ये निवेश की सलाह नहीं है।




