केरल। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजें आने के बाद राज्यों में सरकारों का गठन किया जा रहा है। गुरूवार को कांग्रेस नेता वी डी सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री बनाए जाने के नाम पर सहमति बन गई है। सतीशन पारावूर सीट से विधायक हैं। 2026 के केरल विधानसभा चुनावों में यूडीएफ की निर्णायक जीत से पहले, सतीशन केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके थे। इस गठबंधन ने 140 सदस्यों वाली विधानसभा में कुल 102 सीटों पर जीत हासिल की थी।
इन 3 नामों पर चल रही थी चर्चा
केरलम में मुख्यमंत्री बनाने के लिए पिछले 9 दिनों से चर्चा चल रही थी। कांग्रेस हाई कमान एवं विधायकों के रायसुमारी के बाद सतीशन का नाम तय किया गया है, जबकि मुख्यमंत्री पद के लिए तीन नाम केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्नीथला और वी डी सतीशन का नाम चल रहा था। कोट्टायम से विधायक राधाकृष्णन ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि हाईकमान ने सभी पक्षों की राय सुनी और इस पूरी प्रक्रिया में राहुल सीधे तौर पर शामिल थे। उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई गई थी। जब कई नाम सामने हों तो नेता चुनने को लेकर भ्रम की स्थिति बनना स्वाभाविक है।
राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का रखेगे दावा
केरल के अगले मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होने के बाद, केरल कांग्रेस समिति आज राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात करेगी और सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। जिसके बाद केरल सरकार के शपथ ग्रहण को लेकर डेट का ऐलान किया जाएगा। ज्ञात हो कि तमिनाडू, पश्चिम बंगाल, केरलम समेत 5 राज्य में इस वर्ष विधानसभा के चुनाव हुए है। चुनाव नतीजे आने के बाद सरकार बनाने के लिए विधायकों की पैतरेबाजी एवं हाईकमान की रायसुमारी के साथ ही सरकार गठन का काम हो रहा है।
कौन है सतीशन जो बनेगे केरल के मुख्यमंत्री
- राजनीतिक पृष्ठभूमि: सतीशन एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वकील हैं, जो 2001 से केरल की पारावुर विधानसभा सीट से विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
- पार्टी में भूमिका: 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद, उन्होंने रमेश चेन्निथला से पदभार ग्रहण करते हुए विपक्ष के नेता (LoP) के रूप में कार्य किया। उन्होंने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है।
- जीत के वास्तुकार: 2026 के चुनावों में, यूडीएफ (UDF) ने 140 में से 102 सीटों पर शानदार जीत हासिल की। सतीशन ने कांग्रेस की जमीनी स्तर पर वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- प्रतिबद्धता: चुनाव से पहले, उन्होंने एक बड़ा दावा किया था कि “अगर UDF 100 सीटें नहीं जीतता है, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा,” और 102 सीटों की जीत के साथ उन्होंने इसे सच साबित किया।
- प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 1964 में कोच्चि के पास नेट्टूर में हुआ था और उन्होंने केएसयू (Kerala Students Union) के माध्यम से राजनीति में प्रवेश किया




