Bhojshala is Vagdevi Temple : आज से धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिरा माना जाएगा, हिंदू करेंगे पूजा… MP हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला

Bhojshala is Vagdevi Temple : लंबे समय से चले आ रहे धार भोजशाला विवाद में इंदौर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पूरे परिसर को मंदिर के रूप में स्वीकार किया है। अदालत ने ऐतिहासिक तथ्यों, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की विस्तृत रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए हिंदुओं के हक में यह फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट ने सुलझाया धार भोजशाला विवाद

शुक्रवार को मध्य प्रदेश के धार की विवादित भोजशाला को लेकर अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हो चुका है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने स्पष्ट कर दिया है कि भोजशाला मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ वाग्देवी यानी माँ सरस्वती का भव्य मंदिर होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।”

फैसले के दौरान मध्य प्रदेश में सुरक्षा अलर्ट थी

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे धार शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और करीब 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। प्रशासन ने किसी भी तरह की अफवाह और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की थी। शुक्रवार को नमाज के समय को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई थी।

भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना जाएगा – हाई कोर्ट

हिंदू पक्ष का कहना है कि भोजशाला माता सरस्वती (वाग्देवी) का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। कोर्ट के फैसले के अनुसार परिसर को मंदिर के रूप में मान्यता दी गई है और पूजा-पाठ की अनुमति दी गई है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को सरकार के समक्ष वैकल्पिक जमीन के लिए अपनी मांग रखने का विकल्प भी बताया गया है।

ASI रिपोर्ट से खुलासा : पहले यहां था विशाल मंदिर

इस मामले में हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को ASI को वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया था। इसके बाद 22 मार्च से शुरू हुए 98 दिनों के विस्तृत सर्वे में सामने आया कि मौजूदा संरचना से पहले यहां परमार काल का एक विशाल मंदिर मौजूद था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि निर्माण में मंदिर के अवशेषों का उपयोग किया गया है। ASI की 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट को अदालत ने महत्वपूर्ण आधार माना।

ASI सर्वे की रिपोर्ट में तीन दावों को बनाया गया आधार

• खंभों और दीवारों पर मिले हिंदू देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत के श्लोक।
• संरचना का मूल ढांचा प्राचीन सरस्वती मंदिर (वाग्देवी) से मेल खाता है।
• ASI ने माना कि मस्जिद निर्माण के लिए मंदिर के अवशेषों का इस्तेमाल हुआ।

हिंदू पक्ष ने शिलालेख, मूर्तियां और सिक्कों को मंदिर होने का प्रमाण बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे चुनौती दी। हालांकि ASI ने स्पष्ट किया कि सर्वे निष्पक्ष तरीके से किया गया है और इसमें विभिन्न विशेषज्ञ शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट जाएगा मुस्लिम पक्ष

फैसले के बाद धार के शहर काजी ने कहा कि वे हाईकोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन इस आदेश का अध्ययन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि वे अपना दावा आगे भी जारी रखेंगे और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है। फैसले के बाद अब इस मामले के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। दोनों पक्षों की ओर से कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

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