धार। भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में जज ने फैसला पढ़ते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। कोर्ट के फैसले में परिसर को मां वाग्देवी के मंदिर के रूप में माना गया है। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को अलग से जमीन दी जाएगी। भोजशाला मामले में कोर्ट के फैसले को देखते हुए धार में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं।
कोर्ट ने जैन समाज और मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज की
जो जानकारी आ रही है उसके अनुसार अदालत ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने जैन समाज और मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह निर्णय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिस पर अदालत ने भरोसा जताया है। भोजशाला मामले में अदालत के फैसले ने परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी है।
ऐसा रहा मामला
यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद, तो वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष का दावा है कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।
चार साल से चल रही थी सुनवाई
दरअसल, हिंदू पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने तथा हिंदू समाज को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इस मामले में पिछले चार वर्षों से सुनवाई चल रही थी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया और बहस पूरी होने के बाद अब कोर्ट का फैसला आ गया है। जिसमें कोर्ट ने प्रमाणों के आधार पर भोजशाला को मंदिर बताया है। दरअसल जांच रिर्पोट में यह बताया गया कि भोजशाला में जो प्रतिमाएं है वे हिन्दु देवी-देवताओं की है। इन प्रतिमाओं के स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की गई है।




