Aadarsh Aachar Sanhita Explained: आचार संहिता क्या है? आसान शब्दों में समझें

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What is Model Code of Conduct/ Aadarsh Aachar Sanhita in Hindi: आचार संहिता क्या है? इसकी पूरी जानकारी आपको यहाँ मिलेगी।

Aachar Sanhita Kya Hai: भारत में जब लोकसभा या विधानसभा का चुनाव होते हैं. तब सभी राजनितिक दलों के मंत्री, सांसद और विधायक की शक्तियां चुनाव से कुछ महीने पहले छीन ली जाती हैं. इसका पालन सभी राजनीतिक पार्टियों, उम्मीदवारों एवं अन्य लोगों को करना पड़ता है. ये ऐसे नियम होते हैं जिनका पालन कर चुनाव सही ढंग से कराये जाते हैं. हम और आप मिलके आज एक ऐसे ही नियम के बारे में जानेगें, जिसका नाम हैं ”आचार संहिता”. तो आइये चर्चा करते हैं, आचार संहिता क्या है? और आचार संहिता कब और किसके द्वारा लागू की जाती है.

आदर्श आचार संहिता क्या है?

Aadarsh Aachar Sanhita Kya Hai: ‘आदर्श आचार संहिता’ चुनाव आयोग द्वारा लागू किये जाने वाला एक नियम है. जिसे हम एक दिशा निर्देश भी कह सकते हैं. इन नियमों का पालन सभी राजनितिक दल, उम्मीदवारों और पोलिंग एजेंट को करना पड़ता है. चुनाव के दौरान क्या करना है क्या नहीं करना है? इसका विधिवत सेट तैयार किया जाता है. किन्तु इसे एक कानून के रूप में, संसद में पेश करके नहीं बनाया गया है. बल्कि यह सभी राजनितिक दलों के साथ मिलकर सभी पार्टियों को गाइड करने के लिए आपसी सहमति बनाया गया एक नियम है. इसका भारत के संविधान में कहीं उल्लेख नहीं किया गया है. और न ही कोई कानून पारित किया गया है. फिर भी चुनाव के दौरान व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए इसे लागू किया जाता है.

आदर्श आचार संहिता कब लागु किया जाता है

इसे चुनाव आयोग के द्वारा लागू किया जाता है. इसकी शुरुआत 1960 में केरल विधानसभा चुनाव के दौरान की गई थी, और इसे इसी चुनाव से लागू कर दिया गया. यह नियम चुनाव के दौरान सभी राजनितिक पार्टियों, चुनावी सभाओं, भाषणों, नारों आदि के सम्बन्ध में दिशा निर्देश देता है. यानि मापदंड तैयार करता है. इसके बाद 1962 के लोकसभा चुनाव में आचार संहिता को मान्यता प्राप्त राज्य सरकारों से राय लेने के बाद लागू किया गया था.

फिर चुनाव आयोग ने सन 1979 ने संशोधन कर, इसमें सत्ता में जो पार्टी थी उसे नियमित करने और चुनाव के समय अनुचित लाभ प्राप्त करने से रोकने के लिए एक सेक्शन जोड़ा था. सन 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को किसी भी पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र के बारे दिशानिर्देश करने का निर्देष दिया, जिसे सन 2014 के आम चुनाव में शामिल किया गया.

आदर्श आचार संहिता के प्रावधान क्या है?

आदर्श आचार संहिता सामान्य आचरण, बैठकें, जुलूस, मतदान, मतदान केंद्र, आब्जर्वर, सत्ता में पार्टी एवं चुनाव घोषणा पत्र आदि के साथ 8 मुख्य प्रावधान प्रदर्शित किये गए हैं. इन्ही के आधार पर चुनाव आचार संहिता लागू की जाती है. तो आइये हम इसके प्रावधानों को समझते हैं.

सामान्य आचरण: किसी भी राजनितिक दल को अपने विपक्षी दल की आलोचना, उनकी नीतियों, कार्यक्रमों, पिछले रिकॉर्ड एवं कार्य तक ही सिमित रहना चाहिए। कुछ ऐसे ही कार्यों पर इसमें पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगाया गया है. जो इस प्रकार है.

  1. सुरक्षित वोटों के लिए जातिगत और सांप्रदायिक भावनाओं का उपयोग करना।
  2. गैर सत्यापित रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारों की आलोचना करना।
  3. मतदाताओं को रिश्वत देना या डराना।
  4. किसी व्यक्ति के घरों के बाहर प्रदर्शन या धरना आयोजित करना.

बैठकें: कोई भी राजनितिक दल को अपने कार्यक्रम स्थल के बारे में पुलिस अधिकारीयों को पहले से जानकारी देना और साथ ही पुलिस को किसी बैठक के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने में सक्षम बनाना।

जुलूस: यदि कोई दो या उससे अधिक उमीदवार जुलूस निकल रहें हैं जिसका मार्ग एक ही है तो आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जुलूस में हिंसा न हो. इसके साथ ही राजनीतिक पार्टियों के सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले पुतलों को ले जाने और जलाने की अनुमति भी नहीं दी गई है.

मतदान दिवस: अधिकारिक पार्टी कार्यकर्ताओं का पहचान पत्र मतदान केन्द्र में दिया जाना चाहिए. इनमें पार्टी का नाम, प्रतीक या उम्मीदवार का नाम नहीं होना चाहिए

मतदान केंद्र: मतदाता और चुनाव आयोग के लोगों को ही मतदान केन्द्रों में एंटर करने की अनुमति होगी. इसके अलावा कोई भी मतदान केंद्र में प्रवेश नहीं कर सकता है.

निरीक्षक: चुनाव आयोग द्वारा एक निरीक्षक को भी नियुक्त किया जाता है, उनसे कोई भी उम्मीदवार चुनाव के संचालन के संबंध में किसी भी प्रकार की समस्याओं की रिपोर्ट कर सकता है.

सत्ता में पार्टी

आदर्श आचार संहिता सन 1979 में सत्ता में पार्टी के आचरण में अंकुश लगाने के लिए ये प्रतिबन्ध लगाए है.

  • मंत्रियों को चुनावी यात्रा के दौरान अपने आधिकारिक यात्राओं को कंबाइन नहीं करना चाहिए सरकारी यंत्रों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • चुनाव में जीतने के लिए सरकारी खजाने की कीमत पर प्रचार-प्रसार और आधिकारिक जन माध्यमों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • मंत्रियों और अन्य अधिकारीयों को किसी भी वित्तीय अनुदान की घोषणा नहीं करनी चाहिए या सड़कों के निर्माण, पेयजल की व्यवस्था आदि का वादा भी नहीं करना चाहिए.
  • विपक्षी पार्टियों को सार्वजानिक स्थानों, रेस्ट हाउस का उपयोग करने की अनुमति देना। केवल सत्ता मे जो पार्टी है उसका एकाधिकार नहीं होना चाहिए।

आचार संहिता कब लागू होती है?

आदर्श आचार संहिता या चुनाव आचार संहिता मतदान कार्यक्रम की घोषणा वाले दिन से लागू किया जाता हैऔर अधिसूचना के अनुसार आचार संहिता चुनाव की प्रक्रिया के बाद परिणाम के आने बाद तक लागू रहती है. यानि कुल मिलकर 45 दिन या 2 महीने तक लागु रहती है. यह सभी राजनितिक दल और केयर टेकर गोवेर्मेंट के ऊपर लागू रहती है.

आचार संहिता को कैसे लागू किया जाता है?

संविधान के आर्टिकल 324 के तहत चुनाव आयोग को कुछ अधिकार दिए जाते हैं. ताकि वह देश में केंद्र या राज्य स्तर के चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र आयोजित कर सके. इसके अलावा उन्हें ‘रिप्रेजेंटशन ऑफ द पीपल एक्ट ‘ के तहत कुछ अधिकार दिए गए हैं. दरअसल चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र करने के लिए चुनाव आयोग के पास कुछ शक्तियाँ होना जरुरी थी इसलिए चुनाव आयोग राजनितिक पार्टियों के साथ मिलकर कुछ नियम नियम बनाए, जिसे आचार सहिंता का नाम दिया गया। इसमें यदि कोई राजनितिक पार्टी धार्मिक, जातीय या भाषा के बीच आपसी विरोध पैदा करती है, तो कार्यवाही करने का अधिकार भी चुनाव आयोग के पास है.

क्या आचार संहिता कानूनी रूप से आवश्यक है?

आचार संहिता को क़ानूनी मान्यता नहीं मिली है, लेकिन भारतीय संविधान के आर्टिकल 324 के आलावा अचार संहिता के प्रावधानों से सम्बंधित कुछ प्रावधान हैं जैसे ‘भारतीय दंड संहिता 1860’, ‘दंड प्रक्रिया संहिता 1973’ और ‘रिप्रजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट 1951’ यदि चुनाव के समय कोई भी राजनितिक दल या उनके कार्यकर्ता द्वारा कोई भी अनुचित गतिविधि की जाती है तो इन कानूनों के तहत कार्यवाही की जाती है.

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